स्वच्छ ऊर्जा सुधार पर आगे बढ़ा लद्दाख, देश के पहले जियोथर्मल प्रोजेक्ट विस्तार को LG सक्सेना ने दी मंजूरी

लद्दाख के उपराज्यपाल (L-G) विनय कुमार सक्सेना ने तेल एवं प्राकृतिक गैस निगम (ONGC) के साथ समझौता ज्ञापन (MoU) के विस्तार को अगले 5 वर्षों के लिए मंजूरी दे दी है। समुद्र तल से 14,000 फीट से अधिक की ऊंचाई पर स्थित लद्दाख की पुगा घाटी में विकसित हो रहा यह प्रोजेक्ट भारत की स्वच्छ ऊर्जा यात्रा में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर साबित होगा।

Clean Energy Reforms : स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में लद्दाख एक बड़े बदलाव की ओर बढ़ रहा है। यहां पहली बार भू-तापीय ऊर्जा (जियो-थर्मल एनर्जी) के व्यावसायिक उपयोग की दिशा में काम शुरू होने जा रहा है। इसे ऊर्जा का एक टिकाऊ और पर्यावरण अनुकूल स्रोत माना जा रहा है। भारत के पहले वाणिज्यिक भू-तापीय ऊर्जा प्रोजेक्ट को रफ्तार देने के लिए लद्दाख के उपराज्यपाल (L-G) विनय कुमार सक्सेना ने तेल एवं प्राकृतिक गैस निगम (ONGC) के साथ समझौता ज्ञापन (MoU) के विस्तार को अगले 5 वर्षों के लिए मंजूरी दे दी है। समुद्र तल से 14,000 फीट से अधिक की ऊंचाई पर स्थित लद्दाख की पुगा घाटी में विकसित हो रहा यह प्रोजेक्ट भारत की स्वच्छ ऊर्जा यात्रा में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर साबित होगा।

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स्वच्छ ऊर्जा यात्रा के लिए 'गेम चेंजर' साबित होगी परियोजना।

यह गर्मी पृथ्वी के कोर से निकलती है

इस समझौते के तहत ONGC पुगा घाटी में 1 मेगावाट क्षमता वाला पायलट जियोथर्मल पावर प्लांट स्थापित करेगा। साथ ही लद्दाख में बड़े स्तर पर भू-तापीय ऊर्जा के व्यावसायिक उपयोग के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) भी तैयार की जाएगी। जियोथर्मल ऊर्जा पृथ्वी की सतह के नीचे मौजूद प्राकृतिक गर्मी से प्राप्त होती है। यह गर्मी पृथ्वी के कोर से निकलती है और आसपास की चट्टानों तथा भूमिगत जल को गर्म करती है। भारत में अब तक कोई बड़ा व्यावसायिक जियोथर्मल पावर प्लांट नहीं है, इसलिए पुगा घाटी में विकसित हो रहा यह प्रोजेक्ट देश का पहला ऐसा प्रयास माना जा रहा है।

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