Clean Energy Reforms : स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में लद्दाख एक बड़े बदलाव की ओर बढ़ रहा है। यहां पहली बार भू-तापीय ऊर्जा (जियो-थर्मल एनर्जी) के व्यावसायिक उपयोग की दिशा में काम शुरू होने जा रहा है। इसे ऊर्जा का एक टिकाऊ और पर्यावरण अनुकूल स्रोत माना जा रहा है। भारत के पहले वाणिज्यिक भू-तापीय ऊर्जा प्रोजेक्ट को रफ्तार देने के लिए लद्दाख के उपराज्यपाल (L-G) विनय कुमार सक्सेना ने तेल एवं प्राकृतिक गैस निगम (ONGC) के साथ समझौता ज्ञापन (MoU) के विस्तार को अगले 5 वर्षों के लिए मंजूरी दे दी है। समुद्र तल से 14,000 फीट से अधिक की ऊंचाई पर स्थित लद्दाख की पुगा घाटी में विकसित हो रहा यह प्रोजेक्ट भारत की स्वच्छ ऊर्जा यात्रा में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर साबित होगा।
स्वच्छ ऊर्जा यात्रा के लिए 'गेम चेंजर' साबित होगी परियोजना।
यह गर्मी पृथ्वी के कोर से निकलती है
इस समझौते के तहत ONGC पुगा घाटी में 1 मेगावाट क्षमता वाला पायलट जियोथर्मल पावर प्लांट स्थापित करेगा। साथ ही लद्दाख में बड़े स्तर पर भू-तापीय ऊर्जा के व्यावसायिक उपयोग के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) भी तैयार की जाएगी। जियोथर्मल ऊर्जा पृथ्वी की सतह के नीचे मौजूद प्राकृतिक गर्मी से प्राप्त होती है। यह गर्मी पृथ्वी के कोर से निकलती है और आसपास की चट्टानों तथा भूमिगत जल को गर्म करती है। भारत में अब तक कोई बड़ा व्यावसायिक जियोथर्मल पावर प्लांट नहीं है, इसलिए पुगा घाटी में विकसित हो रहा यह प्रोजेक्ट देश का पहला ऐसा प्रयास माना जा रहा है।
क्यों पड़ी MoU को बढ़ाने की जरूरत?
इससे पहले लद्दाख प्रशासन, LAHDC लेह और ओएनजीसी (ONGC) एनर्जी सेंटर के बीच 6 फरवरी 2021 को एक त्रिपक्षीय समझौता हुआ था, जिसकी अवधि 5 फरवरी 2026 को समाप्त हो गई थी। लद्दाख के अत्यधिक कठिन भूगोल और हाड़ कंपाने वाली सर्दियों (हर्ष वेदर कंडीशन) के कारण प्रोजेक्ट का काफी काम अधूरा रह गया था, जिसे पूरा करने के लिए ONGC लगातार समय-सीमा बढ़ाने की मांग कर रहा था। प्रोजेक्ट के रणनीतिक महत्व को देखते हुए एलजी विनय कुमार सक्सेना ने इसे अगले 5 साल का विस्तार दे दिया है।
चुमाथांग क्षेत्र में सर्वे और जियोथर्मल जांच होगी
दूसरे चरण में चुमाथांग क्षेत्र में सर्वे और जियोथर्मल जांच की जाएगी। इसके बाद ड्रिलिंग और व्यावसायिक स्तर पर ऊर्जा उत्पादन के लिए DPR तैयार होगी। पुगा घाटी और चुमाथांग क्षेत्र हिमालयी जियोथर्मल बेल्ट में स्थित हैं, जहां टेक्टोनिक प्लेटों की टक्कर के कारण जमीन के भीतर अत्यधिक गर्मी पैदा होती है। पुगा घाटी में किए गए परीक्षण में केवल 400 मीटर की गहराई पर 200 डिग्री सेल्सियस से अधिक तापमान और उच्च दबाव वाली भाप प्राप्त हुई है। लद्दाख में यह जियोथर्मल परियोजना और सौर ऊर्जा परियोजनाएं मिलकर पारंपरिक ईंधनों पर निर्भरता कम करेंगी, कार्बन उत्सर्जन घटाएंगी और लद्दाख को देश का प्रमुख नवीकरणीय ऊर्जा केंद्र बनाने में मदद करेंगी। यह पहल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्बन-न्यूट्रल लद्दाख के विजन के अनुरूप मानी जा रही है।
'स्वच्छ ऊर्जा यात्रा के लिए 'गेम चेंजर' साबित होगी परियोजना'
उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना ने कहा कि पुगा घाटी की जियोथर्मल परियोजना लद्दाख और भारत की स्वच्छ ऊर्जा यात्रा के लिए 'गेम चेंजर' साबित हो सकती है। इससे न केवल लद्दाख की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी, बल्कि इसे पर्यावरण के लिहाज से टिकाऊ और कार्बन-न्यूट्रल क्षेत्र बनाने में भी मदद मिलेगी। कठिन भूभाग, बेहद खराब मौसम और तकनीकी चुनौतियों के बावजूद ONGC ने 2025 में 405 मीटर गहरा पहला जियोथर्मल कुआं सफलतापूर्वक ड्रिल किया, जो अब तक लद्दाख का सबसे गहरा जियोथर्मल कुआं है। अध्ययन में भूमिगत तापमान 240 डिग्री सेल्सियस से अधिक पाया गया, जिसे बिजली उत्पादन के लिए पर्याप्त माना जाता है। प्रस्तावित पायलट प्लांट लगभग 200 डिग्री सेल्सियस तापमान पर काम करेगा और इसकी क्षमता 1 मेगावाट होगी।
