Justice Swarana kanta Case: दिल्ली हाईकोर्ट को सोमवार को बताया गया कि आम आदमी पार्टी के प्रमुख अरविंद केजरीवाल, पार्टी के अन्य नेताओं और CJP के प्रवक्ता सौरव दास ने जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा के खिलाफ कथित तौर पर अवमाननापूर्ण पोस्ट अब तक सोशल मीडिया से पूरी तरह नहीं हटाए हैं। यह जानकारी याचिकाकर्ता अशोक चैतन्य ने जस्टिस नवीन चावला और जस्टिस अरुण भारद्वाज की डिवीजन बेंच के सामने दी। चैतन्य ने इन लोगों के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई की मांग की है। दिल्ली हाईकोर्ट ने केजरीवाल समेत चार अन्य लोगों को स्वत संज्ञान क्रिमिनल कंटेम्प्ट मामले में अपना जवाब दाखिल करने के लिए छह सप्ताह का समय भी दिया है।
जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा मामले में केजरीवाल ने डिलीट नहीं किए पोस्ट
पिछली सुनवाई में ट्वीट हटाने की बात कही थी
चैतन्य ने कोर्ट को बताया कि पिछली सुनवाई में उन्होंने अदालत को जानकारी दी थी कि संबंधित ट्वीट डिलीट कर दिए गए हैं। हालांकि, उनका कहना है कि संबंधित कंटेंट अभी भी सोशल मीडिया पर उपलब्ध है और उसे पूरी तरह हटाया नहीं गया है। कोर्ट ने चैतन्य को हलफनामा दाखिल करने और संबंधित सामग्री रिकॉर्ड पर लाने का निर्देश दिया।
जस्टिस शर्मा के रिक्यूजल मामले से जुड़ा है विवाद
यह स्वतः संज्ञान क्रिमिनल कंटेम्प्ट कार्रवाई जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा द्वारा सोशल मीडिया पर शेयर किए गए विभिन्न पोस्ट और वीडियो का संज्ञान लेने के बाद शुरू की गई थी। ये पोस्ट दिल्ली एक्साइज पॉलिसी मामले में उनके सुनवाई से हट जाने से जुड़े थे। जस्टिस शर्मा ने पहले केजरीवाल और अन्य लोगों की ओर से दाखिल रिक्यूजल अर्जियों को खारिज कर दिया था। हालांकि, इसके बाद उन्होंने शराब नीति मामले को दूसरे सिंगल जज के पास ट्रांसफर कर दिया था।
याचिका में सुनियोजित अभियान का आरोप
अशोक चैतन्य ने अपनी याचिका में आरोप लगाया है कि एक्साइज पॉलिसी मामले में जस्टिस शर्मा के सामने रिक्यूजल आवेदन पर सुनवाई के दौरान आप नेताओं और पत्रकार ने एक्स पर उनके खिलाफ सुनियोजित और समन्वित अभियान चलाया। याचिका में आरोप है कि सोशल मीडिया पर जस्टिस शर्मा के खिलाफ गंभीर, निराधार और आपत्तिजनक आरोप लगाए और उन्हें बढ़ावा दिया गया। याचिकाकर्ता का दावा है कि इन पोस्ट में जज के परिवार के सदस्यों की पेशेवर गतिविधियों को लेकर भ्रामक दावों के आधार पर हितों के टकराव, पक्षपात और अनुचित आचरण जैसे आरोप लगाए गए थे।
