Kangana Ranaut DISHA Meeting Mandi: मंडी संसदीय क्षेत्र की भारतीय जनता पार्टी (BJP) सांसद कंगना रनौत ने जिला विकास समन्वय और निगरानी समिति (DISHA) की समीक्षा बैठक में अधिकारियों की कार्यशैली और विकास परियोजनाओं में हो रही देरी को लेकर जमकर क्लास लगाई। करीब चार घंटे तक चली इस बैठक में कंगना ने ढुलमुल रवैये पर नाराजगी जताते हुए अधिकारियों को राजस्व बढ़ाने और 'वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट' (ODOP) जैसी योजनाओं को प्राथमिकता देने की सख्त हिदायत दी।
'हाथ पर हाथ रखकर न बैठें, कटोरा लेकर केंद्र के पास जाने के बजाय राजस्व बढ़ाएं', कंगना रनौत किसपर बुरी तरह भड़कीं?
'दूसरे राज्यों से सीखें, हाथ पर हाथ रखकर न बैठें'
बैठक के दौरान कंगना ने अधिकारियों की कार्यकुशलता और इच्छाशक्ति पर सवाल उठाते हुए कहा कि राज्य को अपनी आय के स्रोत खुद पैदा करने होंगे।
कड़ा रुख: कंगना ने अधिकारियों से कहा, 'आप हाथ पर हाथ धरकर बैठे हैं। अगर सरकार आपके पास नहीं आ रही है, तो आप उनके पास जाइए। इसमें शर्माने की क्या बात है? One District One Product (ODOP) को आगे बढ़ाने से आपको कौन रोक रहा है?'
राजस्व पर जोर: उन्होंने आगे कहा कि हिमाचल में राजस्व सृजन बहुत कम है और बाद में ₹1,000 करोड़ की मदद के लिए केंद्र के पास 'कटोरा लेकर' जाया जाता है। उन्होंने अधिकारियों को सलाह दी कि वे अन्य राज्यों में जाकर सीखें कि वहां अर्थव्यवस्था और राजस्व को कैसे बढ़ावा दिया जा रहा है।
कार्रवाई की चेतावनी: सांसद ने चेतावनी दी कि यदि विभाग समय पर काम पूरा नहीं करते हैं, तो वे अधिकारियों की लापरवाही की औपचारिक रिपोर्ट तैयार करके केंद्र सरकार को भेजेंगी।
कांग्रेस सरकार पर श्रेय लेने और रोड़ा अटकाने का आरोप
बैठक के बाद पत्रकारों से बात करते हुए कंगना रनौत ने हिमाचल प्रदेश की सत्तारूढ़ कांग्रेस सरकार पर निशाना साधा।
क्रेडिट राजनीति: कंगना ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार और उनके प्रयासों से शुरू की गई परियोजनाओं (जैसे भुबू जोत सुरंग और प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना - PMGSY) का श्रेय लेने के लिए कांग्रेस नेता और विधायक शिलापट्ट लगाने की होड़ में लगे रहते हैं।
बैठक से दूरी: उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि विकास कार्यों की क्रेडिट लेने में आगे रहने वाले कांग्रेस विधायक DISHA की इस महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक में शामिल तक नहीं हुए।
सड़क परियोजनाओं में बाधा: उन्होंने आरोप लगाया कि मंडी क्षेत्र में ₹75 करोड़ की लागत वाली 11 सड़क परियोजनाओं के क्रियान्वयन में बेवजह की रुकावटें पैदा की जा रही हैं।
