विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका से ऊपर है भारत का संविधान: जस्टिस बीवी नागरत्ना

  • Written by: आलोक कुमार राव
  • Updated May 30, 2023, 01:47 PM IST

अपने संबोधन मे न्यायाधीश ने कहा कि सामाजिक-आर्थिक न्याय का आदर्श हमारे संविधान के संस्थापकों की सोच के केंद्र में था। इसके बाद दूसरा आदर्श जो कि आज के समय में बहुत्व महत्व रखता है, वह आजादी है। उन्होंने कहा कि संविधान में दिए गए मौलिक अधिकारों के दायरे को बढ़ाने पर चर्चा के लिए अभी भी संभावना है।

Justice BV Nagarathna : सुप्रीम कोर्ट की न्यायाधीश जस्टिस बीवी नागरत्ना ने सोमवार को बड़ी बात कही। जस्टिस नागरत्ना ने कहा कि 'न तो न्यायपालिका, न ही कार्यपालिका और न ही विधायिका सबसे बड़ी हैं। वास्तव में जो चीज सबसे बड़ी है, वह है भारत का संविधान। किसी मामले में खास तरह के फैसले पर सरकार कोर्ट पर सवाल खड़े नहीं कर सकती। ठीक इसी तरह कोर्ट भी विधायिका की बुद्धिमता पर प्रश्न चिन्ह नहीं खड़ा कर सकता।'

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विमोचन समारोह में मुख्य अतिथि थीं जस्टिस नागरत्ना।

किताब के विमोचन के मौके पर रखे अपने विचार

जस्टिस ने कहा, 'न्यायपालिका की आजादी संविधान के सबसे उत्कृष्ट विचारों में से एक है। हम न्यायाधीश इसका सबसे ज्यादा सम्मान करते हैं।' जस्टिस नागरत्ना 'कॉन्स्टिट्यूशनल आइडियल्स : डेवलपमेंट एंड रीयलाइजेशन थ्रू कोर्ट लेड जस्टिस' पुस्तक के विमोचन के मौके पर अपने विचार व्यक्त किए। वह समारोह की मुख्य अतिथि के रूप में वहां आई थीं। इस किताब के लेखक दक्ष हैं।

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