JPC पर सियासी घमासान, तीन हफ्ते बीतने पर भी नहीं बनी समिति; सत्ता-विपक्ष दोनों की चुप्पी

तीन हफ्तों से अधिक का समय बीत जाने के बाद भी समिति का गठन टलता जा रहा है। अब सबकी नजर कांग्रेस और एनडीए के फैसले पर है। क्योंकि बिना विपक्ष के समिति बनी तो उसकी वैधता पर सवाल खड़े होंगे, और अगर नाम ही नहीं आए तो जेपीसी का गठन अधर में लटक सकता है।

JPC Still Unformed: तीन सप्ताह से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन समिति के गठन की प्रक्रिया अब भी अधूरी है। संसदीय गलियारों में इन दिनों सबसे बड़ा सस्पेंस संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) के गठन को लेकर है। मामला उन तीन नए विधेयकों का है, जिनमें प्रावधान किया गया है कि अगर कोई मंत्री, मुख्यमंत्री या प्रधानमंत्री 30 दिन से ज्यादा हिरासत में रहता है तो उसे पद छोड़ना होगा। ये बिल लोकसभा से पारित होकर जेपीसी को भेज दिए गए, लेकिन तीन हफ्ते से ज्यादा वक्त गुजर जाने के बाद भी समिति का गठन नहीं हो पाया है।

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लगातार टल रहा JPC का गठन (फाइल फोटो | PTI)

पक्ष-विपक्ष खामोश

अब सभी की निगाहें कांग्रेस और एनडीए के निर्णय पर टिकी हैं। यदि विपक्ष की भागीदारी के बिना समिति बनाई जाती है, तो उसकी वैधता पर गंभीर सवाल उठ सकते हैं। वहीं, अगर विपक्ष की ओर से नाम नहीं दिए गए तो जेपीसी का गठन अनिश्चितता में फंस सकता है। लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने सभी दलों से अपने-अपने प्रतिनिधियों के नाम भेजने को कहा था, ताकि समिति बन सके लेकिन अब तक किसी भी पार्टी ने नाम नहीं भेजे। यहां तक कि एनडीए यानी भाजपा और उसके सहयोगी दल भी खामोश हैं।

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