Jairam Ramesh Modi Government China Policy: कांग्रेस सांसद जयराम रमेश ने शुक्रवार को केंद्र सरकार पर चीन के सामने रियायतें देने और सीमा पर तनाव के मुद्दे पर चुप्पी साधने का आरोप लगाया। कांग्रेस नेता ने कहा कि भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) के महानिदेशक ने अरुणाचल प्रदेश में पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) के साथ हालिया आमने-सामने की घटनाओं के दौरान बल के प्रदर्शन की सराहना की है। हालांकि, उन्होंने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री और उनका पूरा तंत्र इस मुद्दे पर चुप है।
चीन को लेकर मोदी सरकार पर जयराम रमेश का हमला, सीमा सुरक्षा से व्यापार घाटे तक उठाए सवाल
जयराम रमेश ने अरुणाचल प्रदेश में चीन की ओर से स्थानों के नाम बदलने और 60,000 मेगावाट क्षमता का बांध बनाए जाने को लेकर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि इससे भारत की पारिस्थितिकी और जल सुरक्षा के लिए खतरा पैदा हो सकता है।
'चीन को लेकर केंद्र की रियायतें जारी'
जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में लिखा, “खुद को विश्वगुरु कहने वाले प्रधानमंत्री की ओर से चीन को दी जा रही सोची-समझी रियायतें जारी हैं। ITBP के महानिदेशक ने अरुणाचल प्रदेश में PLA के साथ हालिया आमने-सामने की घटनाओं में बल के प्रदर्शन की सराहना की है, जो उचित भी है। लेकिन इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री और उनका पूरा तंत्र पूरी तरह चुप है।”
उन्होंने कहा कि पिछले महीने तवांग क्षेत्र के तक्सिंग में हुई आमने-सामने की घटना के बाद अरुणाचल प्रदेश के वाचा और दमाई में कोर कमांडर स्तर की बातचीत हुई थी। स्थानीय लोगों ने कथित तौर पर बताया था कि लद्दाख की तरह एक बार फिर गश्त के कुछ बिंदु भारत के हाथ से निकल गए हैं।
कांग्रेस सांसद ने आरोप लगाया कि चीन लगातार अरुणाचल प्रदेश के भारतीय क्षेत्रों के नाम बदल रहा है। साथ ही, वह 60,000 मेगावाट क्षमता का बांध बना रहा है, जो भारत की पारिस्थितिकी और जल सुरक्षा के लिए खतरा है।
चीन के साथ व्यापार घाटा 112 अरब डॉलर पहुंचने का दावा
जयराम रमेश ने भारत और चीन के बीच बढ़ते व्यापार घाटे को भी राष्ट्रीय आर्थिक सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बताया। उन्होंने दावा किया कि वित्त वर्ष 2025-26 में चीन के साथ भारत का व्यापार घाटा रिकॉर्ड 112 अरब डॉलर तक पहुंच गया, जबकि पिछले वित्त वर्ष में यह 99 अरब डॉलर था।
उन्होंने अपनी पोस्ट में लिखा, “चीन के साथ भारत का व्यापार घाटा और बढ़कर 2025-26 में रिकॉर्ड 112 अरब डॉलर पर पहुंच गया, जो पिछले वर्ष 99 अरब डॉलर था। इससे कई उद्योगों में हमारे सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSMEs) को भारी नुकसान हुआ है। 'मेक इन इंडिया' अब 'इंपोर्ट फ्रॉम चाइना' बन गया है। इतना बड़ा व्यापार घाटा अपने आप में हमारी आर्थिक सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा है।”
2020 में पीएम मोदी के बयान का किया जिक्र
कांग्रेस सांसद ने 19 जून 2020 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से दिए गए बयान का भी उल्लेख किया। यह बयान गलवान घाटी में चीनी सैनिकों के साथ हिंसक झड़प में 20 भारतीय सैनिकों के शहीद होने के बाद आया था।
जयराम रमेश ने प्रधानमंत्री के बयान को उद्धृत करते हुए लिखा, “न वहां कोई हमारी सीमा में घुस आया है और न ही कोई घुसा हुआ है, न ही हमारी कोई पोस्ट किसी दूसरे के कब्जे में है।”
उन्होंने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री के इस बयान के बाद से भारत को चीन के प्रति सरकार के रुख की कीमत चुकानी पड़ रही है।
जयराम रमेश ने लद्दाख में चीनी घुसपैठ के दौरान सेना प्रमुख रहे सेवानिवृत्त जनरल मनोज मुकुंद नरवणे के कथित खुलासे का भी जिक्र किया। उन्होंने दावा किया कि उस समय सेना प्रमुख को केवल इतना निर्देश मिला था—“जो उचित समझो, वो करो।”
ऑपरेशन सिंदूर में चीन की भूमिका पर भी उठाए सवाल
जयराम रमेश ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान के सैन्य अभियान में चीन की भूमिका को लेकर दिए गए बयानों का भी जिक्र किया।
उन्होंने कहा कि 4 जुलाई 2025 को उप सेना प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल राहुल सिंह ने सार्वजनिक रूप से बताया था कि पाकिस्तान के सैन्य अभियान में चीन की भूमिका व्यापक और गहराई से जुड़ी हुई थी। रमेश ने आरोप लगाया कि 25 अगस्त 2026 को सेवानिवृत्त चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) जनरल अनिल चौहान ने लेफ्टिनेंट जनरल राहुल सिंह के खुलासों का सार्वजनिक रूप से खंडन किया। उन्होंने आगे दावा किया कि इसके कुछ ही समय बाद जनरल चौहान ने एक ऐसे थिंक टैंक की जिम्मेदारी संभाली, जिसे उन्होंने RSS और BJP के वैचारिक तंत्र का अहम हिस्सा बताया।
