अंतरिक्ष यान निर्माण को तीन गुना करेगा इसरो, 2028 में चंद्रयान-4 होगा लॉन्च...ISRO अध्यक्ष ने बताईं भविष्य की योजनाएं

इसरो अध्यक्ष ने बताया कि इस दौरान पूरी तरह से भारतीय उद्योग द्वारा निर्मित पहले पीएसएलवी का प्रक्षेपण मील का पत्थर साबित होगा। इसरो प्रमुख ने कहा कि सरकार ने चंद्रयान-4 मिशन को मंजूरी दे दी है जिसे चंद्र नमूना-वापसी मिशन के रूप में डिजाइन किया गया है और यह भारत का अब तक का सबसे जटिल चंद्र अभियान होगा।

Chandrayaan-4 in 2028: भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के अध्यक्ष वी. नारायणन ने बताया है कि इसरो ने इस वित्त वर्ष में सात और प्रक्षेपणों की योजना बनाई है और भारत का पहला मानव अंतरिक्ष यान पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार 2027 में ही भेजा जाएगा। नारायणन ने पीटीआई-भाषा से साक्षात्कार में कहा कि इसरो विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं उद्योग क्षमता में तेजी से विस्तार के चरण की तैयारी कर रहा है। उन्होंने कहा कि इसरो चालू वित्त वर्ष के अंत से पहले सात और प्रक्षेपणों का लक्ष्य लेकर चल रहा है जिनमें एक वाणिज्यिक संचार उपग्रह और कई पीएसएलवी (ध्रुवीय उपग्रह प्रक्षेपण यान) एवं जीएसएलवी (भू तुल्यकाली उपग्रह प्रक्षेपण यान) मिशन शामिल हैं।

ISRO mission

ISRO के मिशन (PTI)

चंद्रयान-4 मिशन 2028 में होगा लॉन्च

उन्होंने बताया कि इस दौरान पूरी तरह से भारतीय उद्योग द्वारा निर्मित पहले पीएसएलवी का प्रक्षेपण मील का पत्थर साबित होगा। इसरो प्रमुख ने कहा कि सरकार ने चंद्रयान-4 मिशन को मंजूरी दे दी है जिसे चंद्र नमूना-वापसी मिशन के रूप में डिजाइन किया गया है और यह भारत का अब तक का सबसे जटिल चंद्र अभियान होगा। उन्होंने कहा, हमने चंद्रयान-4 के लिए 2028 का लक्ष्य रखा है। एक अन्य प्रमुख मिशन ‘लूपेक्स’ है जो जाक्सा (जापान एयरोस्पेस एक्सप्लोरेशन एजेंसी) के साथ किया जाने वाला संयुक्त चंद्र ध्रुवीय अन्वेषण कार्यक्रम है। नारायणन ने कहा कि इसरो मिशन के कारण बढ़ती मांग के साथ तालमेल बनाए रखने के लिए अगले तीन साल में अपने वार्षिक अंतरिक्ष यान उत्पादन को तिगुना करने पर भी काम कर रहा है।

End of Feed