भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने इस वित्तीय वर्ष में छह और अंतरिक्ष मिशन लॉन्च करने का लक्ष्य रखा है। ISRO प्रमुख वी. नारायणन ने शुक्रवार को जीएसएलवी-एफ17 (GSLV-F17/EOS-05) मिशन की सफल लॉन्चिंग के बाद यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के दिशा-निर्देशों के तहत संगठन इस वित्तीय वर्ष में छह और लॉन्च की तैयारी कर रहा है।
इसरो ने Gaganyaan पर दिया बड़ा अपडेट। AI IMAGE
शुक्रवार को श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से GSLV-F17 रॉकेट के जरिए EOS-05 अर्थ ऑब्जर्वेशन सैटेलाइट को सफलतापूर्वक अंतरिक्ष में भेजा गया। यह मिशन भारत के लिए इसलिए खास है क्योंकि EOS-05 को जियोसिंक्रोनस ऑर्बिट में स्थापित किया जाना है। इससे भारत और आसपास के क्षेत्रों की लगातार पृथ्वी निगरानी में मदद मिलेगी।
गगनयान मिशन पर भी बड़ा अपडेट
ISRO प्रमुख ने भारत के महत्वाकांक्षी Gaganyaan मानव अंतरिक्ष उड़ान मिशन को लेकर भी जानकारी दी। उन्होंने इसे बेहद तकनीकी और चुनौतीपूर्ण मिशन बताया। नारायणन के मुताबिक, मिशन के लिए तैयार किया जा रहा लॉन्च व्हीकल ह्यूमन-रेटेड है और सुरक्षा प्रणाली समेत कई महत्वपूर्ण विकास कार्य पूरे किए जा चुके हैं। उन्होंने कहा कि गगनयान की तैयारियां तेजी से आगे बढ़ रही हैं और मिशन को लेकर बड़ी मात्रा में तकनीकी काम पूरा किया जा चुका है।
मार्च तक तैयार होगा कुलसेकरपट्टिनम लॉन्च पैड
वी. नारायणन ने तमिलनाडु के कुलसेकरपट्टिनम में बन रहे नए लॉन्च पैड को लेकर भी अपडेट दिया। उन्होंने बताया कि लॉन्च पैड को अगले साल मार्च तक तैयार करने का लक्ष्य है और काम तय योजना के मुताबिक आगे बढ़ रहा है।
स्पेस सेक्टर में 440 स्टार्टअप कर रहे काम
इसरो प्रमुख ने भारत के बढ़ते स्पेस इकोसिस्टम पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि सिर्फ ISRO का विकास पर्याप्त नहीं है, बल्कि देश के पूरे अंतरिक्ष क्षेत्र और स्पेस इकोसिस्टम का विस्तार जरूरी है। उनके मुताबिक, देश में करीब 440 स्टार्टअप कंपनियां स्पेस सेक्टर में काम कर रही हैं, जिससे इस क्षेत्र में रोजगार और कारोबार के नए अवसर पैदा हो रहे हैं। शुक्रवार का GSLV-F17 मिशन भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम के लिए एक और अहम उपलब्धि रहा। यह GSLV की 19वीं उड़ान थी और इसके जरिए EOS-05 को Sub-Geosynchronous Transfer Orbit (Sub-GTO) की दिशा में भेजा गया।
