ऑपरेशन सिंदूर में अहम भूमिका निभाने वाला भारत का स्वदेशी विमानवाहक पोत INS विक्रांत 18 फरवरी से विशाखापत्तनम में शुरू हो रहे अंतरराष्ट्रीय फ्लीट रिव्यू (IFR) में सबकी निगाहों का केंद्र रहेगा। मित्र देशों की नौसेनाएं भारत के इस आधुनिक विमानवाहक पोत को नजदीक से देखने और उसकी क्षमताओं को समझने को उत्सुक हैं।
समुद्र में INS विक्रांत (फाइल फोटो- @IN_WNC)
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ऑपरेशन सिंदूर में निर्णायक भूमिका
IANS की रिपोर्ट के अनुसार ऑपरेशन सिंदूर के दौरान विक्रांत कैरियर बैटल ग्रुप भारतीय नौसेना की आक्रामक रणनीति की रीढ़ साबित हुआ। उत्तरी अरब सागर में तैनाती के जरिए इस समूह ने पाकिस्तान नौसेना को रक्षात्मक स्थिति अपनाने पर मजबूर कर दिया, जिससे संघर्षविराम की स्थिति बनी। अब IFR के लिए यह पोत बंगाल की खाड़ी की ओर प्रस्थान करेगा।
तकनीक और ताकत का संगम
INS विक्रांत 262.5 मीटर लंबा और 61.6 मीटर चौड़ा है, जबकि इसका वजन करीब 45 हजार टन है। 28 नॉट्स की अधिकतम गति वाला यह विमानवाहक पोत करीब 1,600 नौसैनिकों को समायोजित कर सकता है। इसके डेक पर 30 तक लड़ाकू विमान और हेलीकॉप्टर तैनात किए जा सकते हैं, जिनमें मिग-29 के लड़ाकू जेट और आधुनिक बहुउद्देश्यीय हेलीकॉप्टर शामिल हैं।
गौरवशाली विरासत से जुड़ा नाम
INS विक्रांत का नाम भारत के पहले विमानवाहक पोत से लिया गया है, जिसने गोवा मुक्ति अभियान और 1971 के युद्ध में ऐतिहासिक भूमिका निभाई थी। नया विक्रांत उसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए भारतीय नौसेना की शक्ति और आत्मनिर्भरता का प्रतीक बन चुका है।
क्या है अंतरराष्ट्रीय फ्लीट रिव्यू
अंतरराष्ट्रीय फ्लीट रिव्यू एक भव्य नौसैनिक आयोजन है, जिसमें दुनिया भर की नौसेनाएं अपने युद्धपोत, पनडुब्बियां और विमान लेकर हिस्सा लेती हैं। इस अवसर पर भारत के राष्ट्रपति, सशस्त्र बलों के सर्वोच्च कमांडर के रूप में, नौसैनिक बेड़े का निरीक्षण करते हैं। यह आयोजन समुद्री सहयोग और सामरिक एकजुटता को दर्शाता है।
MILAN 26 से बढ़ेगा बहुपक्षीय सहयोग
IFR के साथ ही विशाखापत्तनम में भारतीय नौसेना का प्रमुख बहुपक्षीय अभ्यास MILAN 26 भी आयोजित किया जाएगा। 13वें संस्करण के इस अभ्यास में 135 से अधिक देशों को आमंत्रित किया गया है, जहां साझा अभ्यासों के जरिए नौसेनाओं के बीच तालमेल और सहयोग को मजबूती मिलेगी।
पहले भी दिख चुकी है भारत की समुद्री शक्ति
भारत इससे पहले 2001 में मुंबई और 2016 में विशाखापत्तनम में IFR की मेजबानी कर चुका है। 2016 के आयोजन में 50 देशों के करीब 100 युद्धपोत शामिल हुए थे, जो भारतीय जलक्षेत्र में अब तक का सबसे बड़ा नौसैनिक जमावड़ा माना जाता है।
वैश्विक मंच पर भारत की मजबूत मौजूदगी
INS विक्रांत की मौजूदगी में होने वाला यह IFR न केवल भारत की स्वदेशी रक्षा क्षमताओं का प्रदर्शन करेगा, बल्कि यह भी बताएगा कि भारत इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में एक जिम्मेदार, सक्षम और भरोसेमंद समुद्री शक्ति के रूप में तेजी से उभर रहा है।
