Noted physicist Ashoke Sen: देश के जाने-माने भौतिकविद अशोक सेन को सैद्धांतिक भौतिकी के सबसे बड़े सम्मानों में गिने जाने वाले ऑस्कर क्लेन मेडल से सम्मानित किया गया है। बेंगलुरु स्थित इंटरनेशनल सेंटर फॉर थ्योरेटिकल साइंसेज (आईसीटीएस) ने इसकी घोषणा की। सेन इसी संस्थान में प्रोफेसर हैं। वे यह मेडल जीतने वाले पहले भारतीय वैज्ञानिक हैं।
अशोक सेन को मिला प्रतिष्ठित ऑस्कर क्लेन मेडल। तस्वीर सौजन्य-ICTS
स्ट्रिंग थ्योरी पर किया है काम
यह पुरस्कार 1988 से हर साल स्टॉकहोम यूनिवर्सिटी और रॉयल स्वीडिश एकेडमी ऑफ साइंसेज की नोबेल भौतिकी समिति मिलकर देते हैं। इसे दुनिया भर में सैद्धांतिक भौतिकी की सबसे प्रतिष्ठित उपलब्धियों में से एक माना जाता है। अशोक सेन स्ट्रिंग थ्योरी पर अपने काम के लिए पहचाने जाते हैं। इससे पहले उन्हें डिरैक मेडल और फंडामेंटल फिजिक्स में ब्रेकथ्रू प्राइज जैसे बेहद प्रतिष्ठित सम्मान भी मिल चुके हैं।
क्वांटम सिद्धांत-गुरुत्वाकर्षण के बीच की विसंगतियां
स्ट्रिंग थ्योरी भौतिकी के सबसे बड़े सवालों में से एक को हल करने की कोशिश है। क्वांटम सिद्धांत और गुरुत्वाकर्षण के बीच जो विसंगतियां हैं, वैज्ञानिक उन्हें इसके जरिए दूर करना चाहते हैं। लक्ष्य एक ऐसी नई महा-एकीकृत थ्योरी तक पहुंचना है जो सूक्ष्म उप-परमाणु कणों से लेकर विशाल आकाशगंगाओं तक, हर पैमाने पर सभी कणों और बलों के व्यवहार को समझा सके।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता मिली
आईसीटीएस ने अपने बयान में कहा कि आईसीटीएस-इंफोसिस माधवा चेयर प्रोफेसर सेन को एस-ड्यूलिटी, ब्लैक होल एंट्रॉपी की सटीक गणना और स्ट्रिंग फील्ड थ्योरी पर उनके अग्रणी काम के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता मिली है। संस्थान के अनुसार, इन सभी कार्यों ने आधुनिक स्ट्रिंग थ्योरी को आकार देने में अहम भूमिका निभाई है। पुरस्कार के तहत सेन ने गुरुवार को स्टॉकहोम यूनिवर्सिटी में 'ग्रैविटी फ्रॉम स्ट्रिंग्स एंड स्ट्रिंग्स फ्रॉम ग्रैविटी' विषय पर व्याख्यान दिया।
शीर्ष भौतिकी सम्मानों की कड़ी में नया नाम
ऑस्कर क्लेन मेडल हाल के वर्षों में भारतीय वैज्ञानिकों को मिले शीर्ष भौतिकी सम्मानों की कड़ी में नया नाम है। इसी साल सैद्धांतिक भौतिकविद दीपक धर को डिरैक मेडल का विजेता घोषित किया गया था। सेन के बाद वे यह पुरस्कार पाने वाले दूसरे भारतीय हैं। कुछ साल पहले उन्हें बोल्ट्जमैन मेडल भी मिला था। डिरैक और बोल्ट्जमैन, दोनों मेडल जीतने वाले वे अकेले भारतीय हैं। पिछले साल भारतीय मूल के अमेरिकी भौतिकविद प्रोफेसर जैनेंद्र जैन को वुल्फ प्राइज के विजेताओं में शामिल किया गया था। जैन भारत के कई संस्थानों से भी जुड़े हैं। ये सभी भौतिकी के सबसे प्रतिष्ठित सम्मानों में गिने जाते हैं और इन्हें नोबेल पुरस्कार से ठीक नीचे का दर्जा दिया जाता है।
