भारतीय नौसेना को ‘अंजादीप’ नामक तीसरा एंटी-सबमरीन वॉरफेयर शैलो वॉटर क्राफ्ट आज चेन्नई में सौंपा गया। यह जहाज़ आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक अहम उपलब्धि है। पूरी तरह स्वदेशी रूप निर्मित अंजादीप को गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स और एलएंडटी शिपयार्ड ने मिलकर बनाया गया है।अत्याधुनिक टॉरपीडो, एंटी-सबमरीन रॉकेट और सोनार से लैस यह युद्धपोत नौसेना की पनडुब्बी रोधी और तटीय सुरक्षा क्षमता को मजबूत करेगा।
भारतीय नौसेना में एक और सबमरीन वॉरफेयर की एंट्री। फोटो- भारतीय नौसेना।
इन खासियतों से लैस है अंजादीप
- पनडुब्बी रोधी युद्ध के लिए विशेष रूप से डिजाइन किया गया
- लगभग 77 मीटर लंबा, वॉटरजेट तकनीक से संचालित
- अत्याधुनिक लाइटवेट टॉरपीडो और स्वदेशी एंटी-सबमरीन रॉकेट से लैस
- उथले समुद्री इलाकों में निगरानी के लिए आधुनिक शैलो वॉटर सोनार
- तटीय सुरक्षा, पनडुब्बी खोज और माइन बिछाने में सक्षम
आत्मनिर्भर भारत का प्रतीक
‘अंजादीप’ युद्धपोत भारतीय तकनीक और संसाधनों से बना है। यानी भारत अब अपनी सुरक्षा के लिए दूसरों पर निर्भर नहीं है। इसके निर्माण में 80 प्रतिशत स्वदेशी संसाधनों का प्रयोग किया गया है। ‘अंजादिप’ खास वाटर सॉनोर्स और हथियारों से लैस है, जो समुद्र के नीचे छिपी दुश्मन पनडुब्बियों को आसानी से पहचान सकता है।
चेन्नई में औपचारिक तौर पर नौसेना को सौंपा गया अंजादीप।
उथले पानी में भी असरदार
जहां बड़े युद्धपोत नहीं पहुंच पाते, वहां यह जहाज बेहद कारगर साबित होगा। इससे समुद्री इलाकों में गश्त, सुरक्षा और खुफिया निगरानी और मजबूत होगी। लगभग 77 मीटर लंबा यह एंटी-सबमरीन वॉरफेयर शैलो वॉटर क्राफ्ट वॉटरजेट तकनीक से संचालित है।
कर्नाटक के करवार तट के पास स्थित अंजादीप द्वीप के नाम पर रखा गया है नाम
इस युद्धपोत का नाम कर्नाटक के करवार तट के पास स्थित अंजादीप द्वीप के नाम पर रखा गया है और यह 2003 में सेवामुक्त हुए पेट्या श्रेणी के पूर्व INS अंजादीप की विरासत को आगे बढ़ाता है।
रणनीतिक रूप से अहम?
रणनीतिक रूप से देखें तो यह युद्धपोत भारत के विस्तृत समुद्री तट, बंदरगाहों और संवेदनशील समुद्री मार्गों की सुरक्षा में अहम भूमिका निभाएगा। बढ़ती क्षेत्रीय चुनौतियों और हिंद महासागर क्षेत्र में सक्रिय होती नौसैनिक गतिविधियों के बीच अंजादीप जैसे प्लेटफॉर्म नौसेना को त्वरित प्रतिक्रिया और सतत निगरानी की क्षमता प्रदान करते हैं। हिंद महासागर क्षेत्र में बढ़ती गतिविधियों के बीच नौसेना में इसकी एंट्री साफ संकेत देता है कि भारत अपनी समुद्री सीमाओं की रक्षा को लेकर सतर्क है।
