Drishti 10 StarLiner: भारतीय नौसेना को अपने पहले भारत निर्मित मीडियम एल्टीट्यूड लॉन्ग एंड्योरेंस (MALE) ड्रोन मिल गया है। इसे हिंद महासागर के जल सीमा पर कड़ी नजर रखने की भारत की क्षमता को बढ़ाने के लिए आपातकालीन खरीद तंत्र के तहत हासिल किया गया है। हैदराबाद में इजराइली फर्म एल्बिट के साथ साझेदारी में अदानी डिफेंस और एयरोस्पेस द्वारा निर्मित, दृष्टि 10 स्टारलाइनर (Drishti 10 StarLiner)36 घंटे की सहनशक्ति, उपग्रह कनेक्टिविटी और 450 किलोग्राम का पेलोड ले जाने की क्षमता के साथ मूल हर्मिस स्टारलाइनर (Hermes StarLiner) का भारतीय संस्करण है।
नौसेना को मिला स्वदेशी ड्रोन
नौसेना प्रमुख बोले, 10 महीने में हुआ तैयार
नौसेना प्रमुख एडमिरल आर. हरि कुमार ने कहा कि अपने नाम के अनुरूप ड्रोन अनुबंध के 10 महीनों में ही तैयार हुआ है। नौसेना के समुद्री अभियानों में लगाए जाने के लिए यह हैदराबाद से गुजरात के पोरबंदर तक उड़ान भरेगा। नौसेना और सेना दोनों ने आपातकालीन खरीद के तहत 30,000 फीट की सेवा सीमा वाले दो-दो ड्रोन खरीदे हैं, जो उन्हें 300 करोड़ रुपये तक के सौदों के लिए धीमी नौकरशाही प्रक्रियाओं से पूरी तरह मुक्त करेगा।
70 प्रतिशत स्वदेशी
द प्रिंट के मुताबिक, ड्रोन पर स्वदेशी सामान के बारे में पूछे जाने पर परियोजना से जुड़े सूत्रों ने कहा कि यह 70 प्रतिशत स्वदेशी है और कंपनी इसे बढ़ाने की योजना बना रही है। अभी तक चार यूएवी का ऑर्डर दिया गया है, सेना लगभग 150 MALE ड्रोन प्राप्त करने पर विचार कर रही है। आर्मी एविएशन के महानिदेशक लेफ्टिनेंट जनरल अजय सूरी ने बुधवार को हैदराबाद में एक कार्यक्रम में कहा,भारतीय नौसेना और भारतीय सेना ने उपग्रह संचार-सक्षम ड्रोन की हमारी आकस्मिक जरूरतों को पूरा करने के लिए दृष्टि -10 ड्रोन के लिए ऑर्डर दिए हैं। आधुनिक युद्ध में ड्रोन के महत्व को बताते हुए एडमिरल कुमार ने कहा कि दुनिया भर के देशों के लिए ऐसे स्वचालित सिस्टम एक पसंदीदा विकल्प बन रहे हैं।
हिंद महासागर क्षेत्र में बढ़ेगी ताकत
उन्होंने कहा, हमारे दोनों पड़ोसियों के पास सामूहिक रूप से बहुत यूएवी हैं। इसलिए, हमें एक राष्ट्र के रूप में और सशस्त्र बलों के रूप में सतर्क रहकर इस क्षेत्र में अपनी विशेषज्ञता का इस्तेमाल करना जारी रखना होगा। नौसेना प्रमुख ने कहा कि अत्याधुनिक सेंसर, उन्नत सहनशक्ति, उन्नत संचार क्षमताओं के साथ-साथ स्वचालित टेक-ऑफ और लैंडिंग जैसी नई पीढ़ी की प्रौद्योगिकियों के साथ दृष्टि एक शक्तिशाली निगरानी प्रणाली होगी। इससे हिंद महासागर क्षेत्र में खुफिया, निगरानी और टोही मिशनों में अधिक क्षमता और विश्वसनीयता जोड़ी जा सकेगी।
