ऑपरेशन सिंदूर में इंडियन एयरफोर्स के 80 लाख रुपये के आगे लगते रहे 9 से 18 करोड़, हथियारों की दौड़ में अब IAF ने उठाया क्या कदम?

IAF News: नए हथियार जब मैदान में होंगे तो हवाई युद्ध का कॉस्ट इक्वेशन हमेशा के लिए बदल जाएगा। दुश्मन 50 लाख के हथियार छोड़ने से पहले सोचेगा कि उसको बेहद सस्ती कीमत पर खत्म कर दिया जाएगा।

Indian Air Force Defence: ऑपरेशन सिंदूर के सबक ने रातों-रात भारत के एयर-डिफेंस की रणनीति को बदल दिया है। जब मई 2025 में पाकिस्तान एयर फोर्स के F-16 और JF-17 विमानों ने अपने एयरस्पेस के अंदर से स्टैंड-ऑफ हथियार और ग्लाइड बम दागे, तो IAF को कीमती आकाश-NG और बराक-8 MRSAM इंटरसेप्टर इस्तेमाल करने पड़े, जिनकी कीमत 9-18 करोड़ रुपये प्रति इंटरसेप्टर थी, जबकि दुश्मन के हथियारों की कीमत कभी-कभी 80 लाख रुपये प्रति हथियार से भी कम थी।

हथियारों की दौड़ में अब IAF ने उठाया क्या कदम?

हथियारों की दौड़ में अब IAF ने उठाया क्या कदम?

इस कड़वे गणित ने एक जरूरी, टॉप-प्रायोरिटी बदलाव को जन्म दिया है। भारतीय वायु सेना अब DRDO के हाई-पावर डायरेक्टेड एनर्जी वेपन प्रोग्राम को एयर-लॉन्च किए गए प्रिसिशन-गाइडेड हथियारों, मंडराने वाले ड्रोन और क्रूज-मिसाइलों के बड़े हमलों का अटैक करने के लिए तेजी से आगे बढ़ा रही है।

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