Covid BF.7 : कोरोना ने चीन में हालात बदतर कर दिए हैं। सोशल मीडिया में आ रहे पोस्ट भयावह और परेशान करने वाले हैं। पड़ोसी देश में जो हालात बने हैं वे यह बताने के लिए काफी हैं कि महामारी के आगे बड़ा से बड़ा और शक्तिशाली देश कैसे असहाय-लाचार हो जाता है और घुटने टेक देता है। वैसे तो चीन हमारा शत्रु देश है लेकिन वही एकमात्र ऐसा देश है कि जिसकी नजर हमारी जमीन पर रहती है। इतिहास के अनुभव और गलवान से लेकर तवांग की ताजा झड़प के बाद दोनों देशों के रिश्ते में और खटास आई। सीमा पर इस तनातनी एवं झड़प को हर भारतीय ने महसूस किया। संसद और आम लोगों में चीन के खिलाफ आक्रोश एवं गुस्सा दिखाई दिया।
चीन में कोरोना के हालात बदतर हो गए हैं।
तवांग में झड़प के बावजूद दिखाई हमदर्दी
इस नाराजगी एवं गुस्से के बावजूद चीन के लिए एक हमदर्दी उभरी है। भारत सरकार एवं भारतीय नागरिक संवेदनशील हैं। उनकी चीन के प्रति सहानुभूति है। सभी गिले-शिकवे भुलाकर भारत सरकार संकट की इस घड़ी में चीन की मदद करना चाहती है। चीन में दवाओं की आपूर्ति करने के लिए भारत सरकार ने मदद का हाथ आगे बढ़ाया है। सरकार ने कहा है कि वह बुखार एवं अन्य दवाएं चीन भेजने के लिए तैयार है। दवाओं का निर्यात करने वाली संस्था सेंट्रल ड्रग्स स्टैंडर्ड कंट्रोल ऑर्गनाइजेशन (सीडीएससीओ) ने कहा है कि चीन में ओमीक्रोन के स्वरूप के उपस्वरूप बीएफ.7 से फैल रहे संक्रमण को देखते हुए वह चीन की मदद करने के लिए तैयार है।
संक्रमण के अपने सबसे बुरे दौर से गुजर रहा है चीन
चीन इस समय कोरोना संक्रमण के अपने सबसे बुरे दौर से गुजर रहा है। 'जीरो कोविड पॉलिसी' में ढील देने के बाद लोगों के बीच संक्रमण तेजी से फैला है। बीएफ.7 वायरस लोगों को तेजी से संक्रमित कर रहा है। संक्रमण रोकने के लिए चीनी सरकार के प्रयास नाकाफी साबित हो रहे हैं। अस्पतालों में भर्ती होने के लिए बड़ी संख्या में संक्रमित मरीज पहुंच रहे हैं। सोशल मीडिया में अस्पतालों की जो तस्वीरें एवं वीडियोज आए हैं, उनसे साफ जाहिर है कि वहां बेड्स की कमी हो गई है और अस्पतालों में लाशों का अंबार लगा है।
दवा की दुकानों के बाहर लंबी कतारें
दवा की दुकानों के बाहर लंबी कतारे हैं। दुकानों में बुखार और कोरोना के इलाज में इस्तेमाल होने वाली दवाओं की किल्लत हो गई है। चीन के इस हालात पर विदेश मंत्रालय की करीबी नजर बनाए हुए है। मंत्रालय ने कहा है कि सबसे ज्यादा जेनरिक दवाएं बनाने वाले देशों में शामिल है। ऐसे में वह चीन को दवाएं भेजने के लिए तैयार है। हालांकि, दवाएं भेजने के लिए चीन की तरफ से भारत सरकार को कोई अनुरोध प्राप्त नहीं हुआ है। फिर भी, कटु अनुभवों को दरकिनार कर चीन के लिए दवाएं भेजने की पेशकश करना भारत की दरियादिली को दिखाता है।
दुनिया को स्वस्थ एवं सुखी देखना चाहता है भारत
मदद की यह भावना सनातनी परंपरा के मूलमंत्र 'सर्वे भवन्तु सुखिन: सर्वे सन्तु निरामया' पर आधारित है। भारत पूरी दुनिया को स्वस्थ एवं सुखी देखना चाहता है। चाहे वह उसका दुश्मन देश ही क्यों न हो। भारत दुनिया के प्रति अपनी जिम्मेदारी समझता है। कोरोना महामारी के दौरान भारत ने करीब 180 देशों को वैक्सीन भेजी और करोड़ों लोगों को जिंदगी बचाई।
