Keir starmer in India : भारत की यात्रा पर आए ब्रिटेन के प्रधानमंत्री केअर स्टार्मर ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को आईना दिखाया है। स्टार्मर ने गुरुवार को कहा कि भारत 2028 तक दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था और निर्माण के क्षेत्र में एक सुपरपावर बनकर उभरेगा। ब्रिटेन के पीएम ने कहा कि भारत की इस यात्रा में उनका देश साझेदार बनने के लिए पूरी तरह उपयुक्त है।
पीएम मोदी से मिलते केअर स्टार्मर। तस्वीर-PTI
रूस-यूक्रेन संघर्ष पर भी चर्चा
स्टार्मर ने यहां एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि भारत-ब्रिटेन व्यापार समझौता ब्रिटेन को प्रौद्योगिकी, जीवन विज्ञान, नवीकरणीय ऊर्जा और अन्य क्षेत्रों में नेतृत्व बढ़ाने का अवसर देगा। उन्होंने कहा कि दोनों देश ‘ब्रिटेन-भारत प्रौद्योगिकी सुरक्षा पहल’ को भी गहरा कर रहे हैं। बुधवार को एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल के साथ मुंबई पहुंचे स्टार्मर ने कहा कि उन्होंने भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के साथ रूस-यूक्रेन संघर्ष पर भी चर्चा की और दोनों देशों ने इस संघर्ष को समाप्त करने के लिए साझा दृष्टिकोण अपनाया।
इजरायल-हमास शांति प्रस्ताव को बड़ी उपलब्धि बताया
स्टार्मर ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के इजरायल-हमास शांति प्रस्ताव को बड़ी उपलब्धि बताते हुए कहा कि यह योजना गाजा के बंधकों, नागरिकों और पूरी दुनिया के लिए राहत लेकर आएगी। उन्होंने कहा, ‘अब हम अपने साझेदारों के साथ मिलकर यह सुनिश्चित करेंगे कि यह शांति योजना पूरी तरह और बिना देरी के लागू हो।’प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बृहस्पतिवार को ब्रिटेन में खालिस्तान समर्थक चरमपंथियों की गतिविधियों पर अपने ब्रिटिश समकक्ष केअर स्टार्मर को भारत की चिंताओं से अवगत कराया और कहा कि कट्टरपंथ एवं हिंसक उग्रवाद में शामिल लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए।
खालिस्तानी तत्वों की गतिविधियों पर चिंता जताई
विदेश सचिव विक्रम मिसरी के अनुसार, मोदी ने स्टार्मर के साथ अपनी बातचीत के दौरान यह मुद्दा उठाया।मोदी ने जुलाई में अपनी लंदन यात्रा के दौरान भी ब्रिटेन में खालिस्तानी तत्वों की गतिविधियों पर चिंता जताई थी। मिसरी ने कहा, ‘हां, यह एक ऐसा विषय है जो जुलाई में भी चर्चा में उठा था। आज चर्चा में इसे फिर से उठाया गया।’
आव्रजन विरोधी प्रदर्शनों पर भी हुई बात
भारत, ब्रिटिश धरती पर खालिस्तान समर्थक तत्वों की गतिविधियों पर ब्रिटेन के समक्ष अपनी चिंताओं से अवगत कराता रहा है। ब्रिटेन में हुए आव्रजन विरोधी प्रदर्शनों के बारे में पूछे गए एक सवाल पर, मिसरी ने कहा, ‘ये ऐसे मुद्दे हैं जिनका समाधान ब्रिटिश अधिकारियों को करना होगा। ये ब्रिटेन के अंदर की स्थितियों का परिणाम हैं, लेकिन जहां तक अवैध आव्रजन का सवाल है, यह दोनों देशों के बीच चर्चा का विषय रहा है। आज भी नेताओं के बीच इस पर चर्चा हुई।’
