India Bhutan Relations: भारत और भूटान के बीच वर्षों पुरानी गहरी दोस्ती और मजबूत विकास साझेदारी को एक नया आयाम मिला है। भारत के विदेश सचिव विक्रम मिसरी की भूटान यात्रा के दौरान दोनों पड़ोसी देशों के बीच दो बेहद महत्वपूर्ण समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए। इनमें से एक समझौता ऊर्जा के क्षेत्र में आर्थिक सहायता से जुड़ा है, तो दूसरा स्वास्थ्य शिक्षा और शोध में आपसी सहयोग को लेकर है।
भारत-भूटान के बीच हेल्थ रिसर्च और पढ़ाई पर हुआ अहम करार
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बताया कि विदेश सचिव की यह यात्रा मुख्य रूप से दोनों देशों के बीच चल रहे विकास कार्यों की समीक्षा करने के लिए थी। अपनी दो दिवसीय यात्रा के दौरान विक्रम मिसरी ने भूटान के राजा जिग्मे खेसर नामग्याल वांगचुक, प्रधानमंत्री शेरिंग तोबगे और विदेश मंत्री से मुलाकात कर द्विपक्षीय संबंधों पर विस्तार से चर्चा की।
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दौरे के दौरान पहला समझौता भूटान सरकार और भारत के एक्जिम बैंक (EXIM Bank) के बीच हुआ। इसके तहत भूटान में ऊर्जा परियोजनाओं के विकास के लिए 4,000 करोड़ रुपये का रियायती 'लाइन ऑफ क्रेडिट' दिया जाएगा। वहीं दूसरा समझौता अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) नई दिल्ली और भूटान की 'खेसर ग्यालपो यूनिवर्सिटी ऑफ मेडिकल साइंसेज' के बीच हुआ। इस एमओयू से दोनों देशों के बीच डॉक्टरों, शोधकर्ताओं के आदान-प्रदान और स्वास्थ्य शिक्षा के क्षेत्र में नई तकनीकों को साझा करने का रास्ता साफ होगा।
इसके अलावा, भारत ने भूटान की 13वीं पंचवर्षीय योजना (2024-29) के तहत 332 करोड़ रुपये मूल्य की 12 नई परियोजनाओं को भी मंजूरी दी है। इन परियोजनाओं का सीधा फायदा भूटान की बुनियादी सुविधाओं, स्वास्थ्य सेवाओं, कृषि, शहरी सुविधाओं और आपदा प्रबंधन जैसे अहम क्षेत्रों को मिलेगा।
भारत ने भूटान के समग्र विकास के लिए 10,000 करोड़ रुपये की सहायता का जो संकल्प लिया है, यह कदम उसी का एक हिस्सा है। भारत और भूटान का यह सहयोग दिखाता है कि दोनों देश आपसी विश्वास और सद्भावना के साथ एक-दूसरे की प्रगति के लिए प्रतिबद्ध हैं।
