भारत और पाकिस्तान के बीच गतिरोध जारी है। भारत 'पाक' की नापाक हरकत पर करारा जवाब दे रहा है। खासकर, बॉर्डर एरिया में पड़ोसी मुल्क की ओर से सीजफायर और गोलीबारी जारी है। सबसे बड़ा घमासान गुरुवार की देर शाम देखने को मिला, जब भारत ने जम्मू और पठानकोट में पाकिस्तान के ड्रोन और 8 मिसाइलों को नेस्तानाबूत कर दिया। दावा किया गया है कि भारत ने पाकिस्तान के एयरबॉर्न अर्ली वॉर्निंग एंड कंट्रोल सिस्टम (AWACS) को मार गिराया। यह अवाक्स भारत से झड़प के दौरान पाकिस्तानी एयरफोर्स के फाइटर प्लेन के साथ कॉर्डिनेट कर रहा था और इंडियन एयरफोर्स की सीमा में सेंध लगाने की कोशिश कर रहा था। हालांकि, इसकी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई। लेकिन, यह जानना बेहद जरूरी है कि AWACS क्या है और यह किस प्रकार काम करता है?
AWACS एयरक्राफ्ट (फाइल फोटो)
दरअसल, अवाक्स (AWACS) प्लेटफॉर्म स्ट्रॉंग ग्राउंड बेस्ट रडार की लिमिटेड कैपेसिटी के पार इनफॉर्मेशन कलेक्ट करते हैं। अवाक्स बेहद गतिशील होते हैं और विभिन्न ऊंचाइयों पर उड़ सकते हैं। इससे इन्हें कम ऊंचाई पर उड़ने वाली मिसाइलों, विमानों या पृथ्वी की वक्रता के कारण जमीन पर मौजूद रडार की दृष्टि में न आने वाली वस्तुओं की पहचान भी कर पाते हैं। दावा किया जाता है कि अवाक्स एक व्यापक मोर्चे को कवर कर सकता है, जिससे यह जमीन पर मौजूद रडार और सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलों के साथ समन्वय करके एक गहन नेटवर्क वाली एकीकृत वायु रक्षा (IAD) बना सकते हैं। यह विपक्षी के हवाई क्षेत्र पर भी पैनी नजर रखता है।
कैसे काम करता है AWACS?
AWACS का पूरा नाम Airborne Warning and Control System होता है। यह एक खास तरह का विमान होता है, जिसके ऊपर एक बड़ा गोल रडार फिट होता है। यह रडार बहुत दूर तक दुश्मन के ड्रोन, हेलिकॉप्टर, मिसाइल, हवाई जहाज और कभी-कभार सतह पर चल रही गतिविधियों को भी पकड़ सकता है। इसे 'आसमान से देखने वाली आंख' भी कह सकते हैं। इसका काम सिर्फ नजर रखना नहीं बल्कि, अपने बाकी लड़ाकू विमानों को दिशा बताना और दुश्मन की स्थिती की जानकारी देना भी होता है। AWACS में इंस्टॉल रडार 360 डिग्री तक घूम सकता है और कई सौ किलोमीटर की दूरी तक देख सकता है। यह दुश्मन देश को आसानी से पहचान सकता है। यह किसी भी देश के डिफेंस सिस्टम के लिए शक्ति के तौर पर देखा जाता है।
AWACS कैसे होता है एक्टिवेट?
एयरबॉर्न अर्ली वॉर्निंग एंड कंट्रोल सिस्टम (AWACS) का मुख्य काम हवाई निगरानी करना यानी आसमान में क्या हो रहा है, कौन उड़ रहा है, कहां से उड़ रहा है और किस ओर जा रहा है? यह अपने इर्द गिर्द फाइटर प्लेन को इंडिगेट करता है। इससे फाइटर प्लेन समझ पाते हैं कि कब कहां जाना है, किसे रोकना है? और किस पर हमला करना है? इसके अंदर एक ऑपरेटर टीम मौजूद होती है, जो कम्प्यूटर स्क्रीन पर निगरानी करती है। यह फाइटर जेट्स जैसे कि एफ-16 को रेडियो या डाटा लिंक के जरिए सीधे निर्देश भेज सकता है। यह दुश्मन देश के विमानों से निकलने वाले रेडियो सिग्नल, रडार तरंगो और संचार संकेतों को पकड़ सकता है। इससे वह पता लगा सकता है कि दुश्मन कौन हथियार एक्टिवेट कर रहा है। यही सब संकेत भेजकर वह टारगेट के लिए प्लान तैयार करता है और फाइटर प्लेन को मिशन पर भेजता है।
