Chief Priest in Ram Temple: अयोध्या के राम मंदिर में मुख्य पुजारी के पद पर किसी कि नियुक्ति होगी या नहीं, इस बारे में राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र न्यास के महासचिव चंपत राय ने स्पष्ट कर दिया है। चंपत राय ने कहा है कि राम मंदिर में अब कोई मुख्य पुजारी नहीं होगा क्योंकि आचार्य सत्येंद्र दास जैसा कोई नहीं है। अब किसी को मुख्य पुजारी कहना अतिशयोक्ति होगी। उन्होंने कहा कि छह महीने पहले हमने आचार्य सत्येंद्र दास जी से मुख्य पुजारी की नियुक्ति के बारे में पूछा था, तो उन्होंने भी कहा कि अब इसकी जरूरत नहीं है।
बीते फरवरी महीने में आचार्य सत्येंद्र दास का निधन हो गया।
1993 से राम मंदिर के मुख्य पुजारी थे आचार्य सत्येंद्र दास
राम मंदिर के मुख्य पुजारी आचार्य सत्येंद्र दास का बीते 11 फरवरी को निधन हो गया। वह 1993 से राम मंदिर के मुख्य पुजारी के रूप में अपनी सेवा देते आ रहे थे। राय ने कहा, 'अभी मंदिर में सत्येंद्र दास की उम्र और उन जैसा सम्मान वाला कोई नहीं है। किसी ने भी हनुमानगढ़ी के मंदिर के महंत के रूप में इतनी लंबी सेवा नहीं दी है। वह प्रतिमाह वेतन के रूप में केवल 100 रुपए लेते थे। अभी मंदिर में हर कोई एक उम्र का है और उन जैसा विद्वान भी कोई नहीं। अब किसी को मुख्य पुजारी कहना अतिशयोक्ति होगी।'
लखनऊ एसजीपीजीआई में ली अंतिम सांस
फरवरी महीने में स्ट्रोक के चलते सत्येंद्र दास को अयोध्या के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां से बेहतर इलाज के लिए उन्हें पहले ट्रामा सेंटर और फिर लखनऊ एसजीपीजीआई रेफर किया गया था। अस्पताल प्रशासन द्वारा जारी हेल्थ बुलेटिन के अनुसार वह मधुमेह और उच्च रक्तचाप जैसी गंभीर बीमारियों से भी ग्रस्त थे। 4 फरवरी को प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अस्पताल पहुंचकर उनका कुशलक्षेम जाना था। इस दौरान उन्होंने डॉक्टरों से इलाज की प्रगति पर चर्चा करते हुए आवश्यक दिशा-निर्देश दिए थे।
श्रीराम की सेवा में समर्पित थे-पीएम
आचार्य सत्येंद्र दास को राम मंदिर निर्माण के आरंभ से ही मुख्य पुजारी के रूप में नियुक्त किया गया था और वह श्री राम जन्मभूमि के पूजा कार्यों में सक्रिय रूप से शामिल रहे हैं। उनके निधन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि सत्येंद्र दास जी के देहावसान से अत्यंत दुख हुआ है। धार्मिक अनुष्ठानों और शास्त्रों के ज्ञाता रहे महंत जी का पूरा जीवन भगवान श्री राम की सेवा में समर्पित रहा। देश के आध्यात्मिक और सामाजिक जीवन में उनके अमूल्य योगदान को हमेशा श्रद्धापूर्वक स्मरण किया जाएगा। ईश्वर से प्रार्थना है कि शोक की इस घड़ी में उनके परिजनों एवं अनुयायियों को संबल प्रदान करे। ओम शांति!
