पाकिस्तान में फील्ड मार्शल आसिम मुनीर और सेना की पोल खोलने वाली और पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की बहन नोरीन नियाजी को सेना पर कथित विवादित टिप्पणी के मामले में बड़ी राहत मिली है। लाहौर हाई कोर्ट ने गुरुवार को उन्हें एक सप्ताह की प्रोटेक्टिव बेल (सुरक्षात्मक जमानत) दे दी और इस अवधि के दौरान उनकी गिरफ्तारी पर रोक लगा दी।
ऑपरेशन सिंदूर पर बयान देकर घिरीं नोरीन नियाजी को अदालत से मिली बड़ी राहत। AI IMAGE
अदालत ने निर्देश दिया कि नोरीन नियाजी एक सप्ताह के भीतर संबंधित अदालत में जाकर नियमित कानूनी राहत के लिए आवेदन करें। सुनवाई के दौरान उनके वकील ने दलील दी कि उनके खिलाफ मामला राजनीतिक कारणों से दर्ज किया गया है और जांच एजेंसी अंतरिम राहत मिलने से पहले उन्हें गिरफ्तार करना चाहती थी। दरअसल, उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान की सैन्य तैयारियों और नेतृत्व पर गंभीर सवाल उठाए थे।
क्या है पूरा मामला?
पाकिस्तान की नेशनल साइबर क्राइम इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (NCCIA) ने नोरीन नियाजी के खिलाफ प्रिवेंशन ऑफ इलेक्ट्रॉनिक क्राइम्स एक्ट (PECA) के तहत एफआईआर दर्ज की है। एजेंसी का आरोप है कि उन्होंने सोशल मीडिया और एक इंटरव्यू के जरिए पाकिस्तान और उसकी सेना के खिलाफ झूठे, भड़काऊ और अपमानजनक बयान दिए, जिससे राज्य संस्थानों की छवि को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की गई।
उन्होंने कहा था कि एक इंटरव्यू में पाकिस्तान के हालात के बारे में बात करते हुए नूरीन नियाजी ने कहा, ‘पाकिस्तान की फौजी ताकतों की हालत भारतीय हमले के सामने बहुत खराब हो गई थी। भारत के हमले के बाद पाकिस्तान ने इसे रोकने की कोशिश की, लेकिन वह इसमें सफल नहीं हो पाया। पाकिस्तानी सेना इसे संभालने में पूरी तरह से विफल रही। इसके बाद रावलपिंडी के फौजी मुख्यालय में हड़बड़ी मच गई, जिस सैन्य अभियान को इन्होंने मारका-ए-हक’ के नाम से शुरू किया था।’
भारत-पाक संघर्ष को लेकर क्या कहा था?
इस महीने की शुरुआत में सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक इंटरव्यू में नोरीन नियाजी ने दावा किया था कि मई 2025 में भारत और पाकिस्तान के बीच हुआ सैन्य संघर्ष पाकिस्तान के सैन्य नेतृत्व और भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कथित मिलीभगत का परिणाम था। उन्होंने बिना कोई सबूत पेश किए आरोप लगाया कि इस पूरे घटनाक्रम का उद्देश्य पाकिस्तान की सेना की छवि मजबूत करना था।
उन्होंने यह भी दावा किया कि भारत ने जानबूझकर संघर्ष को आगे नहीं बढ़ाया क्योंकि दोनों देशों के बीच किसी तरह की "समझ" थी। इसके अलावा उन्होंने यह आरोप भी लगाया कि पाकिस्तान इजराइल को मान्यता देने और अब्राहम अकॉर्ड्स में शामिल होने की दिशा में बढ़ रहा था।
