विशेषज्ञों की राय की अनदेखी, सुरक्षा मानकों में लापरवाही का नतीजा है सुरंग हादसा, बोले एक्सपर्ट

  • Edited by: अमित कुमार मंडल
  • Updated Nov 22, 2023, 08:48 AM IST

उत्तरकाशी जिले में चारधाम यात्रा मार्ग पर निर्माणाधीन सिलक्यारा सुरंग का एक हिस्सा 12 नवंबर को ढह गया था जिससे उसमें मलबे के दूसरी ओर श्रमिक फंस गए

Silkyara Tunnel Rescue: भारतीय भू-वैज्ञानिक सर्वेक्षण (जीएसआई) के एक पूर्व अधिकारी ने मंगलवार को कहा कि उत्तरकाशी के सिलक्यारा सुरंग में फंसे 41 मजदूरों को बचाने के लिए क्षैतिज ‘ड्रिल’ करना सुरक्षित होगा। जीएसआई के अतिरिक्त महानिदेशक पद से सेवानिवृत्त हुए त्रिभुवन सिंह पांगती ने कहा कि यदि निर्माण कंपनी ने क्षेत्र की चट्टानी संरचना का अध्ययन करने के लिए पहले एक ‘पायलट’ सुरंग बनाई होती और एक उपयुक्त सहयोग प्रणाली स्थापित की होती तो आपदा को टाला जा सकता था। पांगती ने कहा कि 10 दिनों से सुरंग के अंदर फंसे 41 मजदूरों को बचाने के लिए क्षैतिज खुदाई करना सुरक्षित होगा, लेकिन यदि ऐसा किया जाता है तो इसे उस स्थान से शुरू करना होगा जहां गहराई न्यूनतम हो।

tunnel silkyara

उत्तराखंड टनल हादसा

सुरक्षा के खास मानकों को ध्यान में रखना होगा

उन्होंने कहा कि सुरंग के अंदर बचाव अभियान चलाये जाते समय सुरक्षा के कुछ खास मानकों को भी अवश्य ही ध्यान में रखना होगा। उत्तरकाशी जिले में चारधाम यात्रा मार्ग पर निर्माणाधीन सिलक्यारा सुरंग का एक हिस्सा 12 नवंबर को ढह गया था जिससे उसमें मलबे के दूसरी ओर श्रमिक फंस गए, जिन्हें निकालने के लिए युद्धस्तर पर बचाव अभियान चलाया जा रहा है। पांगती ने कहा कि सिलक्यारा आपदा, सुरंग की खुदाई में अधिक विस्फोट करने, विशेषज्ञों की राय की अनदेखी करने और सुरक्षा मानकों के प्रति लापरवाह रवैये का परिणाम है।

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