कांग्रेस ने आईडीबीआई (IDBI) बैंक के निजीकरण को लेकर मोदी सरकार पर बड़ा हमला बोला है। कांग्रेस का आरोप है कि बोली लगाने वाले बैंक के ही खजाने से खरीद का 50 फीसदी भुगतान करेंगे। कांग्रेस का आरोप है कि पहले अपनी कंपनियों से पैसे लगाएंगे जो कि कुल खरीद का 50 फीसदी से कम है और बाकी IDBI के संपत्ति से ही चुकाएंगे, कांग्रेस ने कहा कि IDBI बैंक का मुनाफा पिछले कुछ सालों में हजारों करोड़ से ऊपर का है।
पूर्व सांसद शक्ति सिंह गोहिल ने इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया
कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने आरोप लगाया-आईडीबीआई बैंक के पैसे से ही आईडीबीआई बैंक को सरकार से विदेशी कंपनी खरीद रही है।
यह मोदी सरकार का एक और बड़ा घोटाला है, जिसकी जांच चाहिए। हमारी मांग है कि आईडीबीआई बैंक को विदेशी कंपनी को बेचने की प्रक्रिया को रोका जाए। और ज्वाइंट पार्लियामेंट्री कमेटी (JPC) से इस पूरी प्रक्रिया की और घोटाले की जांच हो।
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'मोहन भागवत क्यों नहीं बोलते...क्यों चुप है जवाब क्यों नहीं देते?'
पूर्व सांसद शक्ति सिंह गोहिल ने कांग्रेस कार्यालय में इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाते हुए आरोप लगया कि IDBI बैंक Fairfax के प्रेम वत्स को बेचा जा रहा है, IDBI बैंक के पास बहुत प्रॉपर्टी है जिसमें कुछ की कीमत अरबों हो सकती है। उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा-Fairfax कनाडा की कंपनी है, क्यों विदेशी कंपनी को बेचा जा रहा है? RSS स्वदेशी की बात करती है, मोहन भागवत क्यों नहीं बोलते...क्यों चुप है जवाब क्यों नहीं देते? उन्होंने कहा कि IDBI की खरीद प्रक्रिया पर रोक लगे, JPC से बेचने की प्रकिया की जांच हो।
राहुल गांधी और अन्य विपक्षी नेताओं ने सवाल उठाया है
विपक्ष खासतौर पर राहुल गांधी और अन्य विपक्षी नेताओं ने सवाल उठाया है कि एक प्रमुख भारतीय वित्तीय संस्थान को विदेशी हाथों में क्यों सौंपा जा रहा है। साथ ही, आरएसएस (RSS) के वैचारिक जोर और 'स्वदेशी' के सिद्धांतों का हवाला देते हुए यह राजनीतिक सवाल भी उछाला गया है कि इस पर संघ या उसके नेतृत्व की तरफ से सवाल क्यों नहीं उठाए जा रहे हैं?
