IAF Chief AP Singh Last Flight: भारतीय वायुसेना (IAF) के प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने मंगलवार को हैदराबाद के पास डुंडीगल स्थित एयर फोर्स एकेडमी (AFA) में 'एचजीटी-16 किरण' ट्रेनर एयरक्राफ्ट में "यूनिफॉर्म में अपनी आखिरी उड़ान" पूरी की। इस महीने के अंत में अपनी सेवानिवृत्ति से ठीक कुछ दिन पहले भरी गई यह उड़ान बेहद भावुक और ऐतिहासिक रही, जिसने उनके चार दशक से अधिक लंबे गौरवशाली फ्लाइंग करियर का एक पूरा चक्कर पूरा कर दिया।
जिस विमान से शुरू किया करियर उसी से भरी आखिरी उड़ान (चित्र साभार: IAF Via ANI)
जहां से शुरू किया, वहीं किया खत्म
यह 55 मिनट की उड़ान इसलिए भी बेहद खास और यादगार बन गई क्योंकि एयर चीफ मार्शल ने इसे अपने पहले फ्लाइंग इंस्ट्रक्टर विंग कमांडर (रिटायर्ड) वी.एस. कोचर के साथ 'टैल नंबर U 707' वाले किरण विमान में पूरा किया। एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने 28 जनवरी 1984 को इसी एयर फोर्स एकेडमी से और इसी विमान के जरिए अपनी सबसे पहली उड़ान भरी थी। उड़ान भरने के बाद उन्होंने कहा कि मैंने अपनी वायुसेना यात्रा उसी बेसिक विमान से शुरू की थी। मुझे लगता है कि मैं संभवतः पहला ऐसा चीफ हूं जो उसी बेसिक ट्रेनर विमान से रिटायर हो रहा है, जिसे उसने अपने शुरुआती दिनों में उड़ाया था और जो आज भी सेवा में है। मैं अपने इंस्ट्रक्टर कोचर सर का बहुत शुक्रगुजार हूं जिन्होंने मुझे इसी जगह पर उड़ना सिखाया था। इसलिए, मैं बस चाहता था कि यह सर्कल पूरा हो जाए।
वाटर कैनन सैल्यूट और भावुक क्षण
जैसे ही किरण एयरक्राफ्ट एयर फोर्स एकेडमी के रनवे पर लैंड हुआ, वायुसेना के जवानों और अधिकारियों ने एयर चीफ मार्शल एपी सिंह को 'वाटर कैनन सैल्यूट' देकर उनका अभिनंदन किया। इस मौके पर उनके 73 वर्षीय पूर्व गुरु विंग कमांडर (रिटायर्ड) वी.एस. कोचर भी बेहद भावुक दिखे। अपने पूर्व छात्र को सराहतें हुए कोचर ने कहा कि "एपी सिंह अब तक के सबसे प्रतिभाशाली छात्र और बेहतरीन वायुसेना प्रमुखों में से एक हैं। अपने छात्र के साथ दोबारा आसमान में यह सफर करना किसी सपने के सच होने जैसा है।"
तेजस से लेकर किरण तक का सफर
उल्लेखनीय है कि इससे पहले एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने 12 अक्टूबर को जोधपुर एयर फोर्स स्टेशन पर आयोजित अंतरराष्ट्रीय अभ्यास 'तरंग शक्ति' के दौरान स्वदेशी लड़ाकू विमान तेजस (LCA Tejas) में अपनी अंतिम फाइटर जेट उड़ान भरी थी। वहीं मंगलवार को किरण ट्रेनर विमान में भरी गई उड़ान उनकी यूनिफॉर्म में सेवा की अंतिम आधिकारिक उड़ान बन गई। इसके साथ ही वायुसेना के इतिहास का एक गौरवशाली अध्याय संपन्न हो गया, जो अनुशासन, प्रतिबद्धता और एक पायलट व उसके गुरु के अटूट रिश्ते का मिसाल बनकर याद रखा जाएगा।
