Amit Shah in Loksabha: आपराधिक मामले में 30 दिनों तक जेल या हिरासत में रहने पर प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्रियों एवं मंत्रियों के उनके पद से हटाने वाले विधेयक का विरोध विपक्ष कर रहा है। इस विधेयक के बुधवार को लोकसभा में पेश होने पर विपक्ष ने भारी हंगामा किया। इस बिल को लेकर गृह मंत्री अमित शाह और विपक्ष के सदस्यों के बीच वार-पलटवार भी हुआ। बिल पर बढ़ते विपक्ष के इस विरोध के बीच गृह मंत्री ने इस विधेयक को लाने के उद्देश्य के बारे में बताया। X पर अपने पोस्ट में गृह मंत्री ने कहा कि इस बिल का उद्देश्य सार्वजनिक जीवन में गिरते जा रहे नैतिकता के स्तर को ऊपर उठाना और राजनीति में शुचिता लाना है।
लोकसभा में गृह मंत्री अमित शाह। तस्वीर-PTI
'कांग्रेस के एक नेता ने मेरे बारे में व्यक्तिगत टिप्पणी की'
गृह मंत्री ने कहा कि 'आज सदन में कांग्रेस के एक नेता ने मेरे बारे में व्यक्तिगत टिप्पणी भी की, कि जब कांग्रेस ने मुझे पूरी तरह से फर्जी केस में फंसाया और गिरफ्तार कराया, तब मैंने इस्तीफा नहीं दिया। मैं कांग्रेस को याद दिलाना चाहता हूं कि मैंने अरेस्ट होने से पहले ही इस्तीफा दे दिया था और बेल पर बाहर आने के बाद भी, जब तक मैं अदालत से पूरी तरह निर्दोष साबित नहीं हुआ, तब तक मैंने कोई संवैधानिक पद नहीं लिया था। मेरे ऊपर लगाए गए फर्जी केस को अदालत ने यह कहते हुए ख़ारिज किया कि केस 'बदले की राजनीतिक भावना' से प्रेरित है।
बिल को संयुक्त समिति में भेजेने का प्रस्ताव
केंद्रीय गृह मंत्री ने लोकसभा में प्रस्ताव किया कि प्रधानमंत्री, मंत्रियों और मुख्यमंत्रियों को गंभीर अपराध के आरोपों में पद से हटाने के प्रावधान वाले ‘संविधान (130वां संशोधन) विधेयक, 2025’ को संसद की संयुक्त समिति को भेजा जाए। शाह ने कहा कि इन तीनों बिल से जो कानून अस्तित्व में आएगा, वह यह है कि
- कोई भी व्यक्ति गिरफ्तार होकर जेल से प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री, केन्द्र या राज्य सरकार के मंत्री के रूप में शासन नहीं चला सकता है।
- संविधान जब बना, तब हमारे संविधान निर्माताओं ने यह कल्पना भी नहीं की थी कि भविष्य में ऐसे राजनीतिक व्यक्ति भी आएंगे, जो अरेस्ट होने से पहले नैतिक मूल्यों पर इस्तीफा नहीं देंगे। विगत कुछ वर्षों में, देश में ऐसी आश्चर्यजनक स्थिति उत्पन्न हुई कि मुख्यमंत्री या मंत्री बिना इस्तीफा दिए जेल से अनैतिक रूप से सरकार चलाते रहे।
- इस बिल में आरोपित राजनेता को गिरफ्तारी के 30 दिन के अंदर अदालत से जमानत लेने का प्रावधान भी दिया गया है। अगर वे 30 दिन में जमानत प्राप्त नहीं कर पाते हैं, तो 31वें दिन या तो केंद्र में प्रधानमंत्री और राज्यों में मुख्यमंत्री उन्हें पदों से हटाएंगे, अन्यथा वे स्वयं ही कानूनी रूप से कार्य करने के लिए अयोग्य हो जाएंगे। कानूनी प्रक्रिया के बाद ऐसे नेता को यदि जमानत मिलेगी, तब वे अपने पद पर पुनः आसीन हो सकते हैं।
शाह ने कांग्रेस पर साधा निशाना
अपने एक अन्य ट्वीट में शाह ने कहा कि 'एक ओर प्रधानमंत्री ने अपने आप को कानून के दायरे में लाने का संविधान संशोधन पेश किया है और दूसरी ओर कानून के दायरे से बाहर रहने, जेल से सरकारें चलाने और कुर्सी का मोह न छोड़ने के लिए कांग्रेस के नेतृत्व में पूरे विपक्ष ने इसका विरोध किया है। देश को वह समय भी याद है, जब इसी महान सदन में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने संविधान संशोधन संख्या-39 से प्रधानमंत्री को ऐसा विशेषाधिकार दिया कि प्रधानमंत्री के विरुद्ध कोई भी कानूनी कार्यवाही नहीं हो सकती थी।'
