Toilet seat tax : हिमाचल प्रदेश के जल शक्ति विभाग के एडिशनल चीफ सेक्रेटरी ओंकार शर्मा ने टॉयलेट सीट टैक्स विवाद पर सफाई दी है। टाइम्स नाउ नवभारत से खास बातचीत में शर्मा ने कहा कि टॉयलेट सीट के हिसाब से टैक्स वसूलने की जो बात की जा रही है, वह पुरानी है। उस आदेश को वापस लिया जा चुका है। दरअसल, सुक्खू सरकार ने घर में लगे प्रत्येक टॉयलेट सीट के हिसाब टैक्स लगाने की अधिसूचना जारी की थी जिसकी काफी आलोचना हो रही थी। सरकार ने लोगों से प्रत्येक सीट 25 रुपए का शुल्क लेने का फैसला किया था।
सुखविंदर सिंह सुक्खू।
अधिसूचना को वापस ले लिया गया है
शर्मा ने कहा कि जिस नोटिफिकेशन की चर्चा की जा रही है वह पहले हुई थी। उस अधिसूचना को वापस ले लिया गया है। हमने देखा कि जो प्रति सीट वाला नियम बना है यह अच्छा नहीं है इसलिए हमने इसको वापस ले लिया। अधिकारी ने कहा कि कैबिनेट ने एक निर्णय लिया था कि प्रति घर जो ग्रामीण इलाके में हैं, उनसे पानी का चार्ज लिया जाता था लेकिन इसे 2022 में बंद कर दिया गया था। पेयजल को पंपिंग करने का हमारा खर्च 800 करोड़ रुपए हो गया था इसलिए हमने ₹100 प्रति कनेक्शन लेने का फैसला किया था। इसके साथ ही हमने यह भी फैसला किया था कि सीवरेज के जो चार्ज होंगे वो पानी के बिल का 30% किया जाएगा।
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सीएम सुक्खू ने भी टॉयलेट टैक्स को नकारा
दिल्ली में पत्रकारों से बातचीत में मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने हिमाचल प्रदेश में ‘शौचालय कर’ लगाए जाने के दावों को सिरे से खारिज किया। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार का ऐसा कोई भी प्रस्ताव नहीं है। उन्होंने कहा कि राजनीतिक लाभ लेने के लिए इस तरह की बेतुकी और आधारहीन बयानबाजी करने से परहेज किया जाना चाहिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि हरियाणा में विधानसभा चुनाव के मद्देनजर भाजपा धर्म के नाम पर राजनीति कर रही है। इस तरह के मुद्दों को राजनीतिक लाभ लेने के लिए राजनीतिक रंग देने का प्रयास नहीं करना चाहिए, विशेषकर उस स्थिति में जब आरोप वास्तविकता से परे हों।
