लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और अन्य विपक्षी नेताओं ने चुनाव आयोग की विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की है। याचिका दायर करने से पहले बड़ी तादाद में कांग्रेस सहित विपक्षी नेताओं ने मार्च निकाला।
एसआईआर पर विपक्ष के हंगामे के बीच हिमंता का राहुल गांधी को चैलेंज। PTI
इसी बीच असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी को चुनौती देते हुए बैलेट पेपर से चुनाव कराने का प्रस्ताव रखा है। सरमा ने कहा कि अगर राहुल गांधी केरलम में कांग्रेस की सरकार छोड़ने के लिए तैयार हैं, तो वह असम में बैलेट पेपर के जरिए चुनाव लड़ने को तैयार हैं। उन्होंने कांग्रेस को अपनी दोनों सरकारों से इस्तीफा दिलाने की चुनौती देते हुए असम में सभी सीटों पर नए सिरे से चुनाव कराने की बात कही।
हिमंत बिस्वा सरमा ने कांग्रेस पर दिल्ली में विरोध प्रदर्शन के लिए पर्याप्त लोगों की व्यवस्था नहीं कर पाने का आरोप भी लगाया। उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस को प्रदर्शन के लिए असम समेत देश के अलग-अलग हिस्सों से लोगों को जुटाना पड़ा। मुख्यमंत्री के इस बयान ने चुनाव में बैलेट पेपर के इस्तेमाल और कांग्रेस-बीजेपी के बीच राजनीतिक टकराव को लेकर बहस तेज कर दी है।
राहुल गांधी को क्या चुनौती दी?
मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा कि अगर राहुल गांधी केरलम की कांग्रेस सरकार छोड़ने के लिए तैयार हों, तो वह असम में बैलेट पेपर से चुनाव कराने के लिए तैयार हैं। उन्होंने कांग्रेस को चुनौती देते हुए कहा कि पार्टी अपनी दोनों सरकारों से इस्तीफा दिलाए और इसके बाद असम में सभी सीटों पर नए सिरे से चुनाव कराए जाएं।
सरमा ने अपने बयान में कहा कि वह ऐसा प्रस्ताव देकर एक मानक स्थापित करना चाहते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि वह सांसद के पद से इस्तीफा देकर इसके बाद आंदोलन शुरू करने के लिए तैयार हैं। हालांकि, उनके इस प्रस्ताव को लेकर आगे क्या राजनीतिक कदम उठाए जाएंगे, यह स्पष्ट नहीं है।
कांग्रेस पर प्रदर्शन को लेकर साधा निशाना
हिमंत बिस्वा सरमा ने कांग्रेस के विरोध प्रदर्शन पर निशाना साधते हुए दावा किया कि पार्टी के पास दिल्ली में प्रदर्शन करने के लिए पर्याप्त लोग भी नहीं थे। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस को प्रदर्शन में भीड़ जुटाने के लिए असम सहित देश के विभिन्न हिस्सों से लोगों को बुलाना पड़ा। मुख्यमंत्री ने इस बयान के जरिए कांग्रेस के संगठन और उसके विरोध प्रदर्शनों पर सवाल उठाए। हालांकि, प्रदर्शन में लोगों की संख्या और उन्हें जुटाने के संबंध में किए गए दावों की स्वतंत्र पुष्टि जरूरी है।
