Himachal Pradesh New Cabinet Ministers: हिमाचल प्रदेश में सुखविंदर सिंह सुक्खू को कमान मिल गई है। उनके मुख्यमंत्री बनने के बाद अब सबकी नजरें, मंत्रिमंडल पर है। गुजरात की तरह यहां पर मुख्यमंत्री के साथ मंत्रियों ने शपथ नहीं ली है। ऐसे में अब कौन मंत्री बनेगा और उसे क्या विभाग मिलेगा, इसी का सबको इंतजार है। इसके पहले अंदरखाने कांग्रेस में बैठकों का दौर जारी है। जिसमें जातिगत, क्षेत्रीय समीकरण, सभी गुटों को तरजीह देने के साथ-साथ युवा चेहरों को मंत्रिमंडल में शामिल करने के लिए मंथन जारी है।
हिमाचल मंत्रिमंडल के लिए ये नाम रेस में
ये नाम रेस में आगे
ऐसी संभावना है कि मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू शुरू में छोटा मंत्रिमंडल बना सकते हैं। इसमें 10-12 मंत्रियों को जगह मिल सकती है। जिससे कि 2-3 साल बाद मंत्रिमंडल का विस्तार, करना आसान रहे है। पार्टी कांगड़ा और शिमला में कांग्रेस की प्रचंड जीत को देखते हुए, कैबिनेट में यहां से 4-5 लोगों को मंत्री पद की जिम्मेदारी दे सकती है।
मंत्री बनने की रेस में सबसे तय नाम कांग्रेस की प्रदेश अध्यक्ष प्रतिभा सिंह के बेटे विक्रमादित्य सिंह का माना जा रहा है। और इस बात का इशारा खुद मुख्यमंत्री बनने के बाद सुखविंदर सिंह सुक्खु भी दे चुके हैं। इनके अलावा कुलदीप राठौड़, रोहित ठाकुर,अनिरूद्ध सिंह, मोहनलाल ब्राक्टा, धनीराम शांडिल जैसे नेताओं के नाम रेस में शामिल हैं।
पार्टी की कोशिश रहेगी कि शिमाल, कांगड़ा, सोलन क्षेत्र से पार्टी की जीत का तोहफा दिलाने वाले विधायकों को मंत्रिमंडल में पर्याप्त प्रतिनिधित्व मिले। इसके अलावा रवि ठाकुर और जगत सिंह नेगी को जनजातीय कोटे से मंत्री बनाया जा सकता है।
| रेस में कौन से नाम शामिल |
| कुलदीप राठौड़ |
| रोहित ठाकुर |
| मोहनलाल ब्राक्टा |
| अनिरूद्ध सिंह |
| धनीराम शांडिल |
| रवि ठाकुर |
| जगत सिंह नेगी |
| हर्षवर्धन सिंह चौहान |
| राजेश धर्माणी |
चुनावों से पहले जिस तरह पार्टी में गुटबाजी थी, उसे देखते हुए पार्टी सभी गुटों को खुश करने की कोशिश में है। इसी को देखते हुए मुकेश अग्निहोत्री को डिप्टी सीएम बनाया गया है। इसके अलावा वीर भद्र सिंह के बेटे विक्रमादित्य सिंह को मंत्री पद देने का इशारा कर मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह ने प्रतिभा सिंह गुट को भी शांत करने की कोशिश की है। खैर इन कवायदों के बीच मुख्यमंत्री को ब्राह्मण, राजपूत,ओबीसी, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति के लोगों को भी प्रतिनिधित्व देकर जातिगत समीकरण साधने होंगे। विधानसभा चुनावों में कांग्रेस को 68 में से 40 सीटें मिली है। जबकि भाजपा को 25 सीटों पर जीत हासिल हुई है।
