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Himachal Political Crisis: विधानसभा अध्यक्ष के समक्ष पेश हुए कांग्रेस के 6 बागी विधायक, जानें अब आगे क्या

  • Edited by: टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल
  • Updated Feb 28, 2024, 10:33 PM IST

Congress News Today: हिमाचल प्रदेश में सियासी उठापटक तेज हो चुकी है। राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस को लगे झटके के बाद से सियासी गलियारों में चर्चाएं जोरों पर है। इस बीच कांग्रेस के छह 'बागी' विधायक विधानसभाध्यक्ष के समक्ष पेश हुए। चुनाव के दौरान ‘क्रॉसवोटिंग’ करने वाले इन छह विधायकों के खिलाफ याचिका दाखिल की गई है।

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हिमाचल में कांग्रेस का क्या होगा?

Photo : PTI

Himachal Pradesh News: हिमाचल प्रदेश की सियासत में हवा बदलने लगी है, आगे क्या होगा? ये देखना बेहद खास है। क्या सूबे में सत्ता परिवर्तन होने वाला है? दरअसल, राज्यसभा चुनाव में मंगलवार को पार्टी व्हिप का उल्लंघन करने वाले कांग्रेस के छह विधायक कारण बताओ नोटिस के जवाब में बुधवार को अपने वकील के साथ विधानसभा अध्यक्ष के समक्ष पेश हुए और तर्क दिया कि संबंधित सभी दस्तावेज उन्हें मुहैया नहीं कराए गए हैं।

कांग्रेस विधायकों के खिलाफ दाखिल हुई याचिका

विधानसभा अध्यक्ष के समक्ष छह कांग्रेस विधायकों का पक्ष रख रहे वरिष्ठ अधिवक्ता सत्यपाल जैन ने तर्क दिया कि उनके मुवक्किलों को केवल नोटिस और मंगलवार शाम को दाखिल याचिका की प्रति दी गई है जबकि अन्य संलग्नक नहीं मुहैया कराये गये। जैन ने कहा कि नियमों के तहत विधायकों को उन्हें दिए गए नोटिस का जवाब दाखिल करने के लिए सात दिन का समय दिया जाना चाहिए।

जिन्होंने राज्यसभा चुनाव के दौरान की थी क्रॉसवोटिंग

याचिका कांग्रेस के उन छह विधायकों के खिलाफ दाखिल की गई है जिन्होंने राज्यसभा चुनाव के दौरान ‘क्रॉसवोट’ किया था। जैन ने कहा कि दल-बदल विरोधी कानून के तहत जवाब के लिए सात दिन का समय समेत पांच या छह शर्तें हैं, जिनका पालन किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि याचिका की प्रति उपलब्ध कराने के बाद भी जवाब दाखिल करने के लिए सात दिन का समय दिया जाना चाहिए।

राज्यसभा चुनावों में मतदान पर लागू नहीं होता कानून

सत्यपाल जैन ने तर्क दिया कि दल-बदल विरोधी कानून राज्यसभा चुनावों में मतदान पर लागू नहीं होता है। उन्होंने कहा कि उच्चतम न्यायालय ने बार-बार अपने फैसलों में यह स्पष्ट किया है। जैन ने कहा, ‘हम विधानसभा अध्यक्ष से जवाब दाखिल करने के लिए नैसर्गिक न्याय के सिद्धांत के तहत एक सप्ताह का समय देने की मांग करते हैं।’

(भाषा)

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