'विरोध-प्रदर्शन करना नागरिकों का अधिकार है, लेकिन'...दिल्ली में प्रदर्शन को लेकर SC में विशेष सुनवाई, दिए अहम निर्देश

दिल्ली में प्रदर्शन को लेकर पुलिस के खिलाफ दाखिल दो याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई शुरू हो गई है। पहली याचिका वकील शैलेन्द्र मणि त्रिपाठी की तरफ से दाखिल की गई है...

Delhi Protest News: दिल्ली में प्रदर्शन को लेकर पुलिस के खिलाफ दाखिल दो याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा कि हमारा मानना है कि 9 अक्टूबर के आदेश में अदालत ने स्पष्ट निर्देश दिए थे। अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने के लिए कहा गया था कि मेट्रो और ट्रेनों के संचालन को नियंत्रित या विनियमित किया जा सकता है, लेकिन उन्हें पूरी तरह बंद नहीं किया जाना चाहिए। साथ ही अदालत ने कहा कि मुद्दा यह है कि पुलिस की ओर से लगाए गए प्रतिबंध संविधान के अनुच्छेद 19(2) के दायरे में किस हद तक आते हैं। आपको विरोध-प्रदर्शन करने का अधिकार है, इस पर कोई विवाद नहीं है। लेकिन प्रदर्शन करने की प्रक्रिया पुलिस एक्ट के दायरे में होनी चाहिए। आप यह नहीं कह सकते कि विरोध-प्रदर्शन करने का आपका अधिकार पुलिस एक्ट से ऊपर है। इस मामले पर अगली सुनवाई मंगलवार 13 अक्टूबर को होगी।

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जंतर-मंतर प्रदर्शन मामले पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई

दो याचिकाएं हुई थी दाखिल

पहली याचिका वकील शैलेन्द्र मणि त्रिपाठी की तरफ से दाखिल की गई थी जिसमें केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन दिल्ली पुलिस आयुक्त अनुराग कुमार और DMRC अध्यक्ष डी. थारा के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई शुरू करने की मांग की गई है। याचिका मे 9 अक्टूबर के सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अवहेलना का आरोप लगाया गया है। जबकि दूसरी याचिका सीनियर एडवोकेट और TMC की राज्यसभा सांसद मेनका गुरूस्वामी ने दाखिल की थी। इस याचिका में दिल्ली में विपक्षी नेताओं की एहतियातन हिरासत को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है। मेनका गुरुस्वामी ने अपनी याचिका में कहा है कि शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन के मौलिक अधिकार को दबाने के लिए एहतियातन हिरासत का इस्तेमाल नहीं किया जा सकता, खासकर उन नेताओं के खिलाफ जो पहले राज्यों के मुख्यमंत्री रह चुके हैं।

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