Maha Kumbh 2025: ग्लैमर की चका चौंध छोड़ कर अध्यात्म के मार्ग पर चलने के शुरुआती दौर में ही सोशल मीडिया इन्फुलेन्सर हर्षा रिछारिया अब कुंभ से वापस चली गई हैं। अखाड़े के साधुओं के शाही स्नान में रथ पर सवार होने पर उनको जमकर ट्रोल तो किया ही गया था, साथ ही सोशल मीडिया में भी उनके खिलाफ लगातार कटाक्ष किया जा रहा था और लोग उनको ट्रोल कर रहे थे। जिसके बाद विवाद बढ़ता देख, अब हर्षा महाकुंभ से वापस चली गई हैं।
महाकुंभ से वापस लौट गईं हर्षा रिछारिया।
कुंभ से वापस चली गईं हर्षा
कुछ साधु संतों ने भी उनके महाकुंभ 2025 में आने पर आपत्ति जाहिर की थी, जिससे आहत होकर वो कुंभ से वापस चली गई हैं। जिस निरंजनी अखाड़े के महामंडलेश्वर स्वामी कैलाशा नंद सरस्वती ने उनको दीक्षा दी थी, उसी अखाड़े के पदाधिकारी और अखाडा परिषद के अध्यक्ष स्वामी रविंद्र पूरी ने हर्षा का बचाव किया है।
रविंद्र पूरी का कहना है कि हर्षा युवा हैं और सनातन से उसका प्रेम है, इसीलिए वो कुंभ में अपने गुरु के पास आयी थीं। लेकिन जिस तरह से उसको टारगेट किया गया है, ये अच्छी बात नहीं है। रविंद्र पूरी ने उन संतों पर भी आपत्ति की जो हर्षा के रथ पर बैठने पर सवाल उठा रहे थे।
हर्षा रिछारिया को जानिए
इस महाकुंभ में हर्षा रिछारिया छाई रहीं। उनकी साध्वी वेशभूषा, आध्यात्म के प्रति उनकी आस्था और समर्पण की चर्चा के साथ-साथ उनकी खूबसूरती की भी चर्चा खूब हो रही है। 30 वर्षीय महिला (हर्षा रिछारिया) ने महाकुंभ मेले में रथ पर सवार होकर लोगों का ध्यान खींचा। हर्षा रिछारिया की वीडियो और तस्वीरें सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर वायरल होते ही उन्हें सबसे खूबसूरत साध्वी कहा जाने लगा।
रिछारिया का दावा है कि वह निरंजनी अखाड़े के आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी कैलाशानंद गिरि जी महाराज की शिष्या हैं। सनातन धर्म से उनका खास लगाव ही उन्हें महाकुंभ में खींच लाया है। उन्होंने कहा कि उनके पास शोहरत और पैसा था, लेकिन आज वह जहां हैं, वहां शांति हैं। रिछारिया के इंस्टाग्राम पर 1.7 मिलियन फॉलोअर्स हैं। हालांकि, अपने बारे में सोशल मीडिया और चैनलों पर चल रही बातों को लेकर वह परेशान रहीं। उन्होंने महाकुंभ से वापस उत्तराखंड जाने का फैसला किया।
