उत्तराखंड के हल्द्वानी में आयोजित एक राजनीतिक कार्यक्रम के बाद उठा विवाद अब कानूनी मोड़ ले चुका है। कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की हल्द्वानी के रामलीला मैदान में हुई रैली के बाद वहां कथित तौर पर एक "शुद्धिकरण अनुष्ठान" का आयोजन किया गया था। इस मामले ने तूल पकड़ लिया है और अब बेंगलुरु के विधान सौध पुलिस स्टेशन में बीजेपी के वरिष्ठ पदाधिकारियों के खिलाफ प्राथमिकी (FIR) दर्ज कर ली गई है।
यह पूरी कानूनी कार्रवाई कांग्रेस के एसटी विभाग के पूर्व उपाध्यक्ष टी.आर. रामप्पा की शिकायत पर हुई है। अपनी शिकायत में उन्होंने आरोप लगाया है कि खरगे के जाने के बाद जानबूझकर यह अनुष्ठान आयोजित किया गया, जिसका मकसद यह जातिवादी संदेश देना था कि उनके वहां होने से मैदान "अशुद्ध" हो गया था। शिकायतकर्ता का कहना है कि यह सीधा-सीधा एक दलित नेता और उनके समुदाय का अपमान है।
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इस मामले में उत्तराखंड बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट का नाम भी शामिल किया गया है। उन पर आरोप है कि उन्होंने सार्वजनिक रूप से इस विवादित अनुष्ठान का बचाव किया और इसे सही ठहराने की कोशिश की। पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के अलावा अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम (SC/ST Atrocities Act) और नागरिक अधिकार संरक्षण अधिनियम, 1955 के तहत मामला दर्ज किया है।
राजनीतिक गलियारों में इस घटना की कड़ी निंदा हो रही है। इस पूरे वाकये ने एक बार फिर राजनीति में जातिगत भेदभाव और सामाजिक सम्मान के मुद्दे को गर्म कर दिया है। पुलिस अब इस शिकायत के आधार पर मामले की आगे की जांच में जुट गई है।
