जमीन रेलवे की है, अतिक्रमण हटाना होगा- हल्द्वानी लैंड केस में सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला

हल्द्वानी मे रेलवे की जमीन पर अवैध कब्जे को हटाने के खिलाफ दाखिल याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट का अहम आदेश। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अपील करने वाले लोगों को यह अधिकार नहीं है कि वो उसी जगह पर रहने की व्यवस्था की मांग करे। यह मीन रेलवे की है। उन्हें तय करने का अधिकार है कि जमीन का उपयोग कैसे किया जाए।

हल्द्वानी मे रेलवे की जमीन पर अवैध कब्जे के केस में सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाते हुए कहा कि जमीन को खाली करना होगा। जमीन रेलवे की है और यह तय करने का अधिकार भी उसी के पास है कि जमीन का उपयोग कैसे होगा। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि उन परिवारों की पहचान की जाए जो विस्थापन से प्रभावित होंगे। विस्थापित होने की सूरत में रेलवे और राज्य सरकार ने कहा सामूहिक रूप से शिफ्टेड परिवारों को 6 महीने तक प्रति महीने 2 हजार देंगे।

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हल्द्वानी के बनभूलपुरा से रेलवे की जमीन से हटेगा अतिक्रण -सुप्रीम कोर्ट का आदेश

रेलवे के लिए ये जमीन बहुत महत्वपूर्ण है इसलिए पात्र व्यक्ति प्रधानमंत्री आवास योजना के लिए अप्लाई कर सकते हैं जो EWS सेक्शन से आते हैं। केंद्र और राज्य सरकार, नैनीताल जिले की रेवेन्यू ऑथोरिटी वहां कैंप लगाएं और सुनिश्चित करें कि सभी पात्रों को प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत फॉर्म भर सकें। एक हफ्ते का कैंप लगाएं। बनभूलपुरा में पुनर्वास केंद्र बनाएं जाए। और हर परिवार का हेड यहां पर जाए।

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