अहमदाबाद विमान हादसे के बाद शुक्रवार को एक और विमान हादसा होते-होते टल गया है। इस बार गुवाहाटी से चेन्नई जा रहे इंडिगो के विमान को बीच हवा में ईंधन आपातकाल घोषित किए जाने के बाद बेंगलुरु के केम्पेगौड़ा अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पर इमरजेंसी लैंडिंग करानी पड़ी। एयरबस A321 विमान, जो उड़ान संख्या 6E-6764 के रूप में संचालित हो रहा था, जिसमें 168 यात्री सवार थे। प्राप्त जानकारी के मुताबिक, सुरक्षित तरीके से विमान को उतार लिया, तब यात्रियों ने राहत की सांस ली।
(सांकेतिक तस्वीर)
यह एक फ्यूल मेडे कॉल था
शुक्रवार को फ्लाइट चेन्नई पहुंच गई थी, लेकिन भीड़भाड़ के कारण लैंड नहीं कर पाई। लिहाजा, पायलट इन कमांड ने फ्लाइट को बेंगलुरु की ओर मोड़ दिया और फ्यूल मेडे (फ्यूल इमरजेंसी कॉल) दिया, जिसके बाद तुरंत फ्लाइट को प्राथमिकता के आधार पर लैंड करने की अनुमति मिल गई। इमरजेंसी मेडे का मैसेज देने वाले पायलट को पद से हटा दिया गया है।
कब होता है मेडे कॉल?
अहमदाबाद विमान क्रैश के बाद मेडे शब्द लोगों के जेहन में है। तो आपको बता दें यह कॉल पायलट एयर ट्रैफिक कॉल को तब देता है, जब कोई आपात स्थिति होती है या उनके पास कोई दूसरा रास्ता नहीं रह जाता है। मेडे शब्द सुनते ही जितना वक्त होता है उसमें विमान को सुरक्षित करने की कोशिश होती है। कभी कभार ज्यादा खतरा होने पर पायलट सिर्फ मेडे मेडे मेडे ही कह पाते हैं और हादसे हो जाते हैं, इसका उदाहरण अहमदाबाद विमान हादसा है, जो महज 45 सेकेंड में क्रैश हो गया और 241 से अधिक लोग मारे गए।
