सर्च इंजन गूगल ने भारत में बच्चों से जुड़े यौन शोषण वाले ऑनलाइन कंटेंट यानी चाइल्ड सेक्सुअल एब्यूज मटेरियल (CSAM) की रिपोर्ट सीधे भारतीय अधिकारियों को देने पर सहमति जता दी है। कंपनी के प्रवक्ता ने सोमवार को इसकी जानकारी दी। यह कदम ऐसे मामलों में रिपोर्टिंग की प्रक्रिया को तेज करने के लिए अहम माना जा रहा है।
Google ने CSAM रिपोर्टिंग को लेकर बदली अपनी व्यवस्था।
अभी तक क्या था रिपोर्टिंग का तरीका?
गूगल और मेटा जैसी अमेरिकी कंपनियां लंबे समय से चाइल्ड सेक्सुअल एब्यूज मटेरियल से जुड़ी रिपोर्ट अमेरिका स्थित नेशनल सेंटर फॉर मिसिंग एंड एक्सप्लॉइटेड चिल्ड्रेन (NCMEC) को भेजती रही हैं। इसके बाद यह संगठन संबंधित देशों की कानून प्रवर्तन एजेंसियों तक जानकारी पहुंचाता है।
भारतीय अधिकारियों का कहना रहा है कि इस प्रक्रिया में अतिरिक्त समय लग सकता है। ऐसे मामलों में जहां किसी बच्चे की सुरक्षा तत्काल खतरे में हो, रिपोर्ट भारतीय एजेंसियों तक जल्दी पहुंचना महत्वपूर्ण हो सकता है। इसी वजह से भारत सरकार ने टेक कंपनियों से भारतीय मामलों की जानकारी सीधे देश की कानून प्रवर्तन एजेंसियों को देने को कहा था।
गूगल ने क्या कहा?
गूगल के प्रवक्ता ने कहा कि कंपनी ऑनलाइन चाइल्ड सेक्सुअल एब्यूज मटेरियल से निपटने के लिए प्रतिबद्ध है। कंपनी ऐसे कंटेंट को डिटेक्ट करने, रोकने, हटाने और रिपोर्ट करने के लिए लगातार निवेश कर रही है।
गूगल ने कहा कि भारत सरकार के साथ जारी बातचीत के तहत कंपनी ने इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर (I4C) को चाइल्ड सेक्सुअल एब्यूज मटेरियल से जुड़े मामलों में प्रासंगिक जानकारी उपलब्ध कराने की प्रक्रिया को लागू करने का प्रस्ताव दिया है।
मेटा भी उठा चुका है ऐसा कदम
गूगल का यह फैसला ऐसे समय आया है जब मेटा ने भी पिछले सप्ताह भारत में चाइल्ड सेफ्टी से जुड़े मामलों की जानकारी सीधे भारतीय अधिकारियों को देने की घोषणा की थी। मेटा ने कहा था कि वह अपने प्लेटफॉर्म पर बच्चों की सुरक्षा से जुड़े मामलों को सीधे आई4सी के साइबर क्राइम पोर्टल को रिपोर्ट करेगा।
भारत सरकार की ओर से सोशल मीडिया और टेक कंपनियों पर बच्चों से जुड़े हानिकारक कंटेंट की रोकथाम और रिपोर्टिंग को लेकर दबाव बढ़ा है। यह घटनाक्रम ऐसे आरोपों और जांच के बीच सामने आया है, जिनमें सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर बच्चों के यौन शोषण से जुड़े कंटेंट की मौजूदगी का मुद्दा उठाया गया था।
2025 में 2.13 करोड़ से ज्यादा रिपोर्ट
समाचार एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक, अमेरिका स्थित एनसीएमईसी की साइबरटिपलाइन को 2025 में दुनियाभर से बच्चों के यौन शोषण से जुड़े संदिग्ध मामलों की 2.13 करोड़ से ज्यादा रिपोर्ट मिली थीं। ऐसे मामलों की बड़ी संख्या को देखते हुए टेक कंपनियों और कानून प्रवर्तन एजेंसियों के बीच तेजी से सूचना साझा करना एक महत्वपूर्ण मुद्दा बना हुआ है।
गूगल का प्रस्ताव भारत से जुड़े मामलों में रिपोर्टिंग के मौजूदा रास्ते को छोटा करने की दिशा में एक बदलाव है। हालांकि, कंपनी ने इसे भारत सरकार के साथ जारी बातचीत के हिस्से के रूप में बताया है।
