Lok Sabha Debate: नीट-यूजी (NEET-UG) पेपर लीक मामले और नए 'एंटी-पेपर लीक संशोधन विधेयक 2026' (Anti-Paper Leak Bill) को लेकर लोकसभा में चल रही गंभीर बहस के दौरान एक बेहद अनोखा नजारा देखने को मिला। पक्ष और विपक्ष, दोनों तरफ के सांसदों ने अपने राजनीतिक विरोधियों पर निशाना साधने के लिए संसद में आम तौर पर इस्तेमाल होने वाली भाषा के बजाय सोशल मीडिया पर युवाओं (Gen Z) के बीच लोकप्रिय शब्दों जैसे कि 'Delulu', 'FOMO', 'MIA' और 'Clock it' का जमकर इस्तेमाल किया।
लोकसभा में NEET पेपर लीक और कानून संशोधन पर बहस
संसद में इंटरनेट की इस भाषा को लेकर राजनीति गरमा गई। जहां भाजपा सांसदों ने इन शब्दों से विपक्ष पर तंज कसा, वहीं प्रियंका गांधी, अखिलेश यादव और सुप्रिया सुले जैसी विपक्षी नेताओं ने इसका जवाब दिया।
सत्तापक्ष के सांसदों ने Gen Z भाषा में किए तीखे वार
श्रीकांत शिंदे (शिवसेना सांसद) ने उन्होंने 20 जुलाई को विपक्ष द्वारा प्रधानमंत्री आवास के बाहर किए गए विरोध प्रदर्शन पर तंज कसते हुए कहा, मैं विपक्ष के इस प्रदर्शन को युवाओं (Gen Z) की भाषा में समझाता हूं। वे पहले 37 दिनों तक गायब यानी MIA (Missing in Action) रहे। फिर उन्हें FOMO (Fear of Missing Out) पीछे छूट जाने का डर) सताने लगा, तो उन्होंने पीएम आवास के बाहर धरना दे दिया। अंत में वे Delulu (Delusional - भ्रम में जीना) हो गए कि छात्र भी उनके इस प्रदर्शन में शामिल होंगे, लेकिन वहां कोई नहीं आया।
बीजेपी सांसद बांसुरी स्वराज ने पेपर लीक के खिलाफ लाए गए नए सख्त कानून के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तारीफ करते हुए कहा, जहां कांग्रेस ने नीतियों में एक शून्य पैदा कर दिया था, वहीं मोदी जी ने इसे Clock it किया (यानी समय रहते भांप लिया और पकड़ लिया) और एक ठोस समाधान (कानून) लेकर आए। भाजपा सांसद तेजस्वी सूर्या ने भी विपक्ष को Delulu (भ्रम में रहने वाला) कहा। उन्होंने कहा, विपक्ष इस मुगालते में है कि पेपर लीक के मुद्दे पर देश का युवा उनके साथ है, लेकिन इससे बड़ा कोई भ्रम नहीं हो सकता। युवा इस 'तू-तू मैं-मै' से परेशान हैं और वह सिस्टम के 'Source Code' (मूल ढांचे) को ठीक होते देखना चाहते हैं, जो सिर्फ मोदी सरकार कर रही है।
विपक्ष का पलटवार: प्रियंका गांधी और अखिलेश यादव का जवाब
कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने प्रधानमंत्री मोदी की सोशल मीडिया रील्स और वीडियो पर तंज कसने के लिए Gen Z के संदर्भ का ही सहारा लिया। उन्होंने कहा, अगर प्रधानमंत्री सच में देश के युवाओं (Gen Z) का दिल जीतना चाहते हैं, तो अलग-अलग कैमरा एंगल बदलकर वीडियो बनाने से कुछ नहीं होगा। प्रधानमंत्री को कैमरों का एंगल नहीं, बल्कि अपने दिल का एंगल बदलने की जरूरत है। उन्होंने मांग की कि सरकार युवाओं के साथ हुए इस अन्याय को स्वीकार करे।
समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने नीट विवाद के विरोध में छात्रों द्वारा लगाए गए एक नारे का जिक्र करते हुए सरकार पर हमला बोला। उन्होंने कहा, छात्रों के आंदोलन ने एक नारा दिया है— 'झुकाने वाला चाहिए, सरकार भी झुकती है' और देश की नई पीढ़ी (Gen Z) को सरकारों को झुकाना अच्छी तरह आता है। उन्होंने सरकार की नीयत पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब तक नीयत साफ नहीं होगी, परीक्षाएं साफ नहीं होंगी।
सुप्रिया सुले: यह ऑक्सफोर्ड डिक्शनरी का मुकाबला नहीं
एनसीपी (शरद चंद्र पवार) की नेता सुप्रिया सुले ने संसद में युवाओं के इन स्लैंग्स (शब्दावली) के इस्तेमाल पर कड़ी आपत्ति जताई। तेजस्वी सूर्या के बाद बोलने उतरीं सुप्रिया सुले ने कहा, हम यहां युवाओं की भाषा (Gen Z lingo) में क्यों उलझ रहे हैं? यह बहस इस बात पर नहीं है कि ऑक्सफोर्ड की ऑनलाइन डिक्शनरी से किसे कितने शब्द आते हैं। हम यहां एक बहुत ही गंभीर शिक्षा संकट पर बात करने आए हैं। हालांकि, उन्होंने भाजपा पर पलटवार करते हुए यह भी कह दिया कि आप भी इस Delulu (भ्रम) में मत रहिए कि देश का युवा आपके साथ खड़ा है।
संसद में नए परीक्षा बिल पर चर्चा
संसद में पिछले एक हफ्ते से जारी गतिरोध खत्म होने के बाद केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने लोकसभा में 'सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026' को चर्चा के लिए पेश किया था। उन्होंने कहा कि यह कानून छात्रों के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए लाया गया है। यह पूरी बहस देश भर में नीट-यूजी 2026 पेपर लीक को लेकर मचे भारी बवाल और तत्कालीन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग के बीच हुई।
