'धनुष-बाण' से लेकर 'मशाल' तक, बदलते रहे शिवसेना के चुनाव चिह्न, ऐसा है इतिहास

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  • Updated Oct 11, 2022, 06:54 PM IST

निर्वाचन आयोग ने शिवसेना के उद्धव ठाकरे गुट को ‘मशाल’ चुनाव चिन्ह आवंटित किया है। उसे 'धनुष-बाण' चुनाव चिन्ह हासिल करने में 23 वर्षों का समय लगा था। शिवसेना के चुनाव चिन्ह का इतिहास जानिए।

मुंबई: निर्वाचन आयोग से 'मशाल' चुनाव चिह्न मिलने के साथ शिवसेना के उद्धव ठाकरे नीत खेमा ने एक नई शुरुआत की है। हालांकि, पार्टी के लिए यह कोई नया चिह्न नहीं है क्योंकि इसने 1985 में भी इसका उपयोग कर एक चुनाव जीता था। शिवसेना के साथ 1985 में रहे छगन भुजबल ने मुंबई की मझगांव सीट पर हुए चुनाव में ‘मशाल’ चुनाव चिह्न के साथ जीत हासिल की थी। उस समय पार्टी का कोई स्थायी चुनाव चिह्न नहीं था। भुजबल ने बाद में बगावत कर दी और पार्टी छोड़ दी और कांग्रेस में शामिल हो गए। अब वह राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के एक प्रमुख नेता है।

Shiv Sena-Uddhav Balasaheb Thackeray

शिवसेना के चुनाव चिन्ह का इतिहास

शिवसेना ने अतीत में नगर निकाय और विधानसभा चुनावों के दौरान भी 'मशाल' चुनाव चिह्न का इस्तेमाल किया था। शिवसेना का गठन बाल ठाकरे ने 1966 में किया था और इसे 'धनुष-बाण' चिह्न हासिल करने में 23 वर्षों का समय लगा था। शिवसेना को 1989 में राज्य स्तरीय पार्टी के रूप में मान्यता प्राप्त थी, जिसका मतलब है कि वह राज्य में एक चुनाव चिह्न का इस्तेमाल कर सकती थी। लेकिन, 1966 से 1989 तक वह लोकसभा, विधानसभा और नगर निकाय चुनाव विभिन्न चिह्नों के साथ लड़ी।

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