Tarang Shakti Exercise 2026: भारतीय वायु सेना (IAF) द्वारा राजस्थान के जोधपुर एयर फोर्स स्टेशन पर आयोजित किए जा रहे बहुराष्ट्रीय युद्ध अभ्यास 'तरंग शक्ति' में भाग लेने के लिए फ्रांसीसी वायु और अंतरिक्ष सेना पूरी तरह तैयार है। फ्रांस की सेना अपने महत्वाकांक्षी अभियान 'मिशन पेगास' के तहत इस अभ्यास का हिस्सा बन रही है। इस अभ्यास में भागीदारी का मुख्य उद्देश्य भारत और फ्रांस की वायु सेनाओं के बीच इंटरऑपरेबिलिटी को बढ़ाना और आपसी रक्षा सहयोग को एक नए स्तर पर ले जाना है।
भारत-फ्रांस की अटूट दोस्ती
फ्रांसीसी दूतावास द्वारा जारी बयान के अनुसार, फ्रांस की वायु सेना 8 सितंबर से 15 अक्टूबर तक अपने सातवें 'मिशन पेगास' का संचालन कर रही है। इस मिशन का मकसद दुनिया के किसी भी कोने में तेजी से वायु शक्ति का प्रदर्शन करना और फ्रांस के विदेशी क्षेत्रों व रणनीतिक हितों की रक्षा करना है। यह अभियान अनिश्चित और संवेदनशील वैश्विक माहौल में फ्रांस की निर्णायक सैन्य क्षमता और कूटनीतिक पहुंच को उजागर करता है।
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जोधपुर में आयोजित हो रहे 'तरंग शक्ति' अभ्यास के इस संस्करण में फ्रांस के अलावा अमेरिका, जर्मनी, ऑस्ट्रेलिया, बांग्लादेश, श्रीलंका और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) जैसे कुल सात विदेशी देश भाग ले रहे हैं। इस अभ्यास में पहली बार अमेरिकी मल्टी-रोल स्टील्थ फाइटर जेट F-35 भी अपनी ताकत दिखाएगा। दूसरी ओर, भारतीय वायु सेना भी अपनी रक्षा क्षमता का प्रदर्शन करते हुए राफेल, मिराज-2000, जगुआर, तेजस, मिग-29 और सुखोई-30 एमकेआई जैसे अग्रणी लड़ाकू विमानों को मैदान में उतारेगी।
भारत में फ्रांस के राजदूत थिएरी माथौ ने इस भागीदारी पर खुशी जताते हुए कहा कि भारत, फ्रांस का एक प्रमुख रणनीतिक रक्षा साझेदार है। उन्होंने कहा कि समुद्र में 'वरुण', हवा में 'गरुड़' और जमीन पर 'शक्ति' जैसे द्विपक्षीय अभ्यासों के साथ-साथ 'तरंग शक्ति' जैसे बहुराष्ट्रीय सैन्य अभियानों में नियमित भागीदारी से दोनों देशों के बीच सैन्य समन्वय मजबूत होता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह साझेदारी इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में क्षेत्रीय और वैश्विक सुरक्षा सुनिश्चित करने तथा अंतर्राष्ट्रीय कानूनों और नौवहन की स्वतंत्रता को बनाए रखने के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
फ्रांस का 300 सदस्यीय दल चार राफेल F4 विमानों, तीन A330 टैंकर विमानों और दो A400M एटलस मालवाहक विमानों के साथ जोधपुर पहुंच चुका है। यह दल आर्कटिक से शुरू होकर 40,000 किलोमीटर का सफर तय करते हुए प्रशांत महासागर, पूर्वी एशिया और हिंद महासागर के रास्ते भारत पहुंचा है। अभ्यास के दौरान फ्रांसीसी वायु सेना के उप प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल डोमिनिक टार्डिफ और मिशन पेगास के प्रमुख मेजर जनरल जूलियन साबेन भी भारतीय सशस्त्र बलों के साथ उच्च स्तरीय वार्ता करेंगे।
