Operation Sindoor: पाकिस्तान के खिलाफ चलाए गए ऑपरेशन सिंदूर में अपने प्राणों की आहुति देने वाले छह सैनिकों के नाम पहली बार सार्वजनिक किए गए हैं। इनमें सेना के पांच जवान और वायु सेना का एक जांबाज शामिल हैं। इन वीर सपूतों के नाम सेना युद्ध स्मारक (आर्मी वॉर मेमोरियल) की वेबसाइट पर अपलोड कर दिए गए हैं। इनमें से दो जवानों कोउनकी असाधारण वीरता के लिए सम्मानित किया गया है।
ऑपरेशन सिंदूर में पाकिस्तान की हुई बुरी हार।
देश के लिए बलिदान देने वाले इन छह वीरों के नाम इस प्रकार हैं
- सूबेदार मेजर पवन कुमार
- राइफलमैन सुनील कुमार
- लांस नायक दिनेश कुमार
- अग्निवीर मूड मुरली नाइक
- हवलदार सुनील कुमार सिंह
- सार्जेंट सुरेंद्र कुमार (वायु सेना)
दो शहीदों को वीरता पदक
इन छह शहीदों में से दो को उनकी असाधारण वीरता के लिए सम्मानित किया गया है। राइफलमैन सुनील कुमार को वीर चक्र (मरणोपरांत) और सार्जेंट सुरेंद्र कुमार को वायु सेना मेडल से नवाजा गया है। 8 जून को राष्ट्रपति भवन में आयोजित रक्षा अलंकरण समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने राइफलमैन सुनील कुमार को मरणोपरांत वीर चक्र प्रदान किया। यह सम्मान उनके माता-पिता को दिया गया, जिन्होंने अपने वीर बेटे की कुर्बानी पर पूरे देश को गर्वान्वित किया।युद्ध स्मारक पर अमर होंगे नाम
इन शहीदों के नाम वर्ष 2025 में विभिन्न अभियानों में प्राण न्यौछावर करने वाले जवानों की सूची के तहत सार्वजनिक किए गए हैं। सेना युद्ध स्मारक पर इन वीरों के नाम एक ईंट पर उकेरे जाएंगे, जो आने वाली पीढ़ियों को उनके बलिदान की याद दिलाते रहेंगे। ऑपरेशन सिंदूर भारत द्वारा पाकिस्तान के विरुद्ध चलाया गया एक सैन्य अभियान था, जिसमें इन बहादुर जवानों ने अपनी जान देकर मातृभूमि की रक्षा की। इन शहीदों का बलिदान राष्ट्र कभी नहीं भूलेगा।ऑपरेशन सिंदूर के दौरान दिखीं स्वदेशी रक्षा क्षमताएं-राष्ट्रपति
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने गुरुवार को कहा कि आत्मनिर्भर देश आर्थिक स्थिरता बनाए रखने में अधिक सक्षम होता है और 'ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान यह स्पष्ट रूप से देखने को मिला कि स्वदेशी रक्षा क्षमताएं किसी देश की अभियानगत तत्परता और रणनीतिक प्रभावशीलता को बढ़ाने में महत्वपूर्ण होती हैं। यहां राष्ट्रपति भवन में सैन्य अभियंता सेवा (एमईएस) के प्रशिक्षु अधिकारियों के एक समूह को संबोधित करते हुए मुर्मू ने कहा कि वर्तमान समय में, जब दुनिया विभिन्न संघर्षों और भू-राजनीतिक तनावों का सामना कर रही है, आत्मनिर्भरता राष्ट्रों के लिए एक रणनीतिक आवश्यकता बन गई है। उन्होंने कहा कि आत्मनिर्भर देश संकट की परिस्थितियों में अपनी आर्थिक स्थिरता बनाए रखने और विकास संबंधी प्राथमिकताओं को आगे बढ़ाने में अधिक सक्षम होता है।
