पूर्व CJI चंद्रचूड़ पर पूर्व जज एस के कौल के बयान से छिड़ा विवाद, जानिए क्या कह रहे एक्सपर्ट?

ये विरोधाभासी आकलन कौल द्वारा अपनी आत्मकथा 'विदाउट फियर ऑर फेवर' के प्रकाशन से पहले 'द वायर' को दिए एक साक्षात्कार में की गई टिप्पणियों के बाद सामने आए हैं।

भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश (CJI) डी वाई चंद्रचूड़ द्वारा न्यायिक नियुक्तियों के तरीके पर सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश संजय किशन कौल की आलोचना पर कानूनी विशेषज्ञों ने दो अलग-अलग और परस्पर विरोधी राय व्यक्त की हैं। जहां एक वरिष्ठ वकील ने चंद्रचूड़ के कार्यकाल का बचाव किया है, वहीं दूसरे ने कौल की चिंताओं और आरोपों का पूरी तरह समर्थन किया है। यह पूरी बहस जस्टिस कौल की आने वाली किताब 'विदाउट फियर ऑर फेवर' (Without Fear or Favour) के रिलीज से पहले न्यूज पोर्टल 'द वायर' को दिए गए उनके इंटरव्यू के बाद शुरू हुई है। कौल ने आरोप लगाया था कि जस्टिस चंद्रचूड़ प्रशासनिक मामलों और जजों की नियुक्तियों में सरकार के प्रति जरूरत से अधिक नरम थे।

Former CJI and Justice Kaul Row

पूर्व CJI पर पूर्व जज जस्टिस कौल के आरोप

विशेषज्ञों में मतभेद

संवैधानिक कानून विशेषज्ञ वरिष्ठ अधिवक्ता राकेश द्विवेदी ने चंद्रचूड़ के कार्यकाल को भारतीय न्यायपालिका के लिए "गौरवशाली स्वर्णिम काल" बताया और न्यायिक नियुक्तियों से संबंधित मामलों में सरकार के प्रति अत्यधिक सम्मान दिखाने के आरोप को खारिज कर दिया। वरिष्ठ अधिवक्ता और सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (एससीबीए) के पूर्व अध्यक्ष विकास सिंह ने कौल की आलोचना का समर्थन करते हुए आरोप लगाया कि सरकार के प्रति चंद्रचूड़ का आचरण और संवेदनशील मामलों के आवंटन को संभालने का तरीका न्यायिक स्वतंत्रता के प्रति उनके दृष्टिकोण पर सवाल उठाता है। ये विरोधाभासी आकलन कौल द्वारा अपनी आत्मकथा 'विदाउट फियर ऑर फेवर' के प्रकाशन से पहले 'द वायर' को दिए एक साक्षात्कार में की गई टिप्पणियों के बाद सामने आए हैं।

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