दुनियाभर से भीख मांगकर अपनी जरूरतें पूरी करने वाला पाकिस्तान, हमारे देश में अस्थिरता फैलाने का कोई मौका नहीं छोड़ता। ऐसा ही कुछ पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI ने हाल ही में दिल्ली में जंतर-मंतर पर हुए छात्र आंदोलन (CJP Protest) के दौरान भी करने की कोशिश की थी। भारतीय सुरक्षा एजेंसियों ने ISI की इस साजिश का खुलासा किया है। पंजाब के अमृतसर में पकड़े गए पाकिस्तान-समर्थित आतंकी मॉड्यूल की जांच में उनका दिल्ली के जंतर-मंतर से जुड़ा कनेक्शन सामने आया है।
पंजाब में ISI के दो माड्यूल के 9 लोग गिरफ्तार
पंजाब पुलिस के मुताबिक, आरोपियों से पूछताछ में दावा किया गया है कि पाकिस्तान में बैठे हैंडलर्स के निर्देश पर कुछ सदस्य जुलाई में दिल्ली गए थे। जांच एजेंसियां अब आरोपियों के बयानों की पुष्टि के लिए नई दिल्ली रेलवे स्टेशन से जंतर-मंतर तक के CCTV फुटेज और अन्य तकनीकी सुबूतों की जांच कर रही हैं।
पंजाब में ISI Terror Module के 9 लोग गिरफ्तार
पंजाब पुलिस ने हाल में ISI से जुड़े दो मॉड्यूल का भंडाफोड़ कर नौ लोगों को गिरफ्तार किए जाने की जानकारी दी थी। इनमें चार नाबालिग भी शामिल हैं। पुलिस के मुताबिक, जांच में पेट्रोल बम, अवैध हथियार और कारतूस बरामद किए गए हैं।
25 जुलाई की रात दिल्ली रवाना होने का दावा
पूछताछ में आरोपी वंश कुमार ने कथित तौर पर जांच एजेंसियों को बताया कि 25 जुलाई को देव सिंह उर्फ करण ने विशाल उर्फ गंगू को दिल्ली जाने के लिए कहा। इसके बाद अमृतसर रेलवे स्टेशन पर वंश कुमार, विशाल उर्फ गंगू, रोहित, देव सिंह उर्फ करण और सुखदीप सिंह के इकट्ठा होने और शाम करीब 7:30 बजे ट्रेन से नई दिल्ली रवाना होने का दावा किया गया।
पुलिस के मुताबिक, आरोपी 26 जुलाई की सुबह करीब 6 बजे नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पहुंचे और वहां से सीधे जंतर-मंतर गए। जांच में यह भी दावा सामने आया है कि वहां उत्तर प्रदेश का रहने वाला एक अज्ञात व्यक्ति उनसे मिला, जिसे पाकिस्तान स्थित हैंडलर ने वहां भेजा था।
जंतर-मंतर पर मिला था संदिग्ध सामान
पूछताछ के अनुसार, जंतर-मंतर पर मिले व्यक्ति ने अमृतसर से गए इन लोगों को आठ कांच की बोतलें देकर पेट्रोल बम बनाने और वर्दीधारी सुरक्षाकर्मियों को निशाना बनाने के निर्देश दिए। आरोपियों के बयान के मुताबिक, उन्होंने अपने पाकिस्तानी हैंडलर को फोन कर बताया कि वे पेट्रोल बम बनाने का सामान एक बेंच के नीचे छोड़कर वापस लौट रहे हैं और अब इस साजिश का हिस्सा नहीं बनेंगे। इसके बाद वह अमृतसर लौट गए।
ये भी पढ़ें - Monsoon के दुश्मन 'डॉल्फिन' ने प्रशांत महासागर में पकड़ी रफ्तार, बारिश पर फिर से लगेगा ब्रेक!
पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि जंतर-मंतर पर वास्तव में कौन मिला, वहां क्या गतिविधि हुई और आरोपियों ने किससे संपर्क किया। इसके लिए सैकड़ों CCTV फुटेज, मोबाइल डेटा और अन्य फोरेंसिक सुबूतों की जांच की जा रही है।
दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल भी जांच में जुटी
मामले में दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल पंजाब पुलिस के साथ मिलकर जांच कर रही है। एजेंसियां आरोपियों की दिल्ली यात्रा, संभावित स्थानीय संपर्क और पाकिस्तान स्थित हैंडलर्स से कथित बातचीत की कड़ियों को जोड़ने में जुटी हैं।
जांच का अहम सवाल यह भी है कि 25 जुलाई की रात तक जंतर-मंतर पर आंदोलन खत्म हो चुका था। 26 जुलाई तक दिल्ली पुलिस के जवान और अर्धसैनिक बलों के जवान वहां एहतियातन ड्यूटी पर मौजूद थे। क्या जंतर-मंतर पर मौजूद सुरक्षाकर्मियों को ही निशाना बनाने की योजना थी या इसके पीछे कोई व्यापक मकसद था। इसका जवाब CCTV, तकनीकी और फोरेंसिक जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।
