लाखों नागरिक परेशान होंगे- मेट्रो बंद करने पर सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी, ट्रेन बंद करने पर भी पूछे तीखे सवाल

दिल्ली में प्रदर्शन के कारण मेट्रो और ट्रेनें रद्द करने पर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त ऐतराज जताया और केंद्र को निर्देश दिया कि आम लोगों की आवाजाही प्रभावित न हो।

राजधानी दिल्ली में 10 अक्टूबर को होने वाले प्रदर्शन के मद्देनजर मेट्रो स्टेशन बंद करने, ट्रेनें रद्द करने और रास्ते रोकने के प्रशासनिक फैसलों पर सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने गहरा रोष व्यक्त किया है। मामले की सुनवाई करते हुए भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि उपद्रवियों को रोकना प्रशासन की जिम्मेदारी है, लेकिन इस प्रक्रिया में लाखों आम नागरिकों और दैनिक यात्रियों की रोजी-रोटी व आवाजाही को ठप नहीं किया जा सकता।

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सुप्रीम कोर्ट में मेट्रो बंद होने पर सुनवाई (फाइल फोटो- PTI)

प्रदर्शनकारियों की अनुपस्थिति पर सवाल

सुनवाई की शुरुआत में शीर्ष अदालत ने पूछा कि कल के प्रदर्शन से जुड़े मुख्य याचिकाकर्ता खुद कोर्ट के समक्ष उपस्थित क्यों नहीं हुए?

आम जनता की समस्याओं पर CJI की चिंता

मुख्य न्यायाधीश ने मेट्रो बंद करने के फैसले पर गंभीर चिंता जताते हुए कहा, "मेट्रो बंद होने से लाखों आम नागरिक, नौकरीपेशा लोग और बुजुर्ग बुरी तरह प्रभावित होंगे। हर व्यक्ति के पास अपनी कार नहीं होती है। प्रशासन उपद्रवी भीड़ को रोकने के लिए कदम उठाए, लेकिन ऐसा कोई काम न करे जिससे आम जनता को नुकसान पहुंचे या उनकी रोजी-रोटी प्रभावित हो।"

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