भारत की आर्थिक रीढ़ बनी महिलाएं: 2017 से 2024 तक की बड़ी छलांग

भारत में महिला सशक्तिकरण आर्थिक विकास की असली धुरी बन चुका है। पीएलएफएस के अनुसार महिला रोजगार दर 22% से बढ़कर 40.3% हो गई और ग्रामीण क्षेत्रों में 96% की अभूतपूर्व वृद्धि दर्ज हुई। सात साल में 1.56 करोड़ महिलाएं संगठित कार्यबल में जुड़ीं और 68% मुद्रा लोन की लाभार्थी बनीं। महिला-नेतृत्व वाले विकास की इस यात्रा ने भारत को 2047 तक 70% महिला कार्यबल भागीदारी के लक्ष्य की राह पर खड़ा कर दिया है।

भारत एक बड़े बदलाव का गवाह बन रहा है। जहां कभी महिलाएं केवल पारंपरिक भूमिकाओं तक सीमित समझी जाती थीं, वहीं अब वे देश की अर्थव्यवस्था और विकास यात्रा की असली धुरी बन चुकी हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में आज नारी शक्ति को सिर्फ समर्थन ही नहीं, बल्कि नेतृत्व की भूमिका भी दी जा रही है। यही वजह है कि विकसित भारत के सपने को साकार करने में महिलाएं केंद्रबिंदु बन गई हैं।

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नारी शक्ति की प्रतीकात्मक तस्वीर

नवीनतम पीएलएफएस आंकड़ों के मुताबिक, 2017-18 से 2023-24 के बीच महिला रोजगार दर 22 प्रतिशत से बढ़कर 40.3 प्रतिशत हो गई है। बेरोजगारी दर भी घटकर 3.2 प्रतिशत पर आ गई है। खास बात यह है कि ग्रामीण भारत में महिला रोजगार लगभग 96 प्रतिशत बढ़ा है, जबकि शहरी इलाकों में यह वृद्धि 43 प्रतिशत रही है। यानी अब महिलाएं खेत-खलिहान से लेकर कॉर्पोरेट दफ्तरों तक अपनी पहचान दर्ज करा रही हैं।

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