रामायण वार्ता के जरिए संस्कृत और संस्कृति पर जोर, दुर्ग से सांसद विजय बघेल ने संभाली कमान

  • Authored by: ललित राय
  • Updated Mar 17, 2023, 06:47 PM IST

Ramayana Varta: दुर्ग से सांसद विजय बघेल ने कहा कि इस कार्य के लिए टीम भी गठित कर ली गई है, इसका प्रकाशन पहले चरण में नई दिल्ली से ही होगा, फिर अगले चरण में धीरे-धीरे भारत के हर राज्य से इसका प्रकाशन शुरू करवाने का प्रयत्न करेंगे। उन्होंने देश के युवाओं से इस अभियान से जुड़ने की अपील की।

KEY HIGHLIGHTS
  • सांसद के नेतृत्व में होगा ‘रामायण वार्ता’ का संस्कृत में प्रकाशन
  • संस्कृत और संस्कृति के प्रोत्साहन के लिए रामायण रिसर्च काउंसिल का है प्रकल्प ‘रामायण वार्ता’
  • सांसद ने कहा, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर करेंगे प्रसार, पीएम को भी विषय से अवगत कराएंगे
  • रामायण वार्ता प्रकाशन समिति के अध्यक्ष बने सांसद विजय बघेल

Ramayan Varta: रामायण रिसर्च काउंसिल(Ramayan research council) संस्कृत भाषा को बढ़ावा देने के लिए एक नई मुहिम की शुरूआत कर रही है। काउंसिल ने ‘रामायण वार्ता’ (ramayan varta publication)नाम से एक पाक्षिक पत्रिका के प्रकाशन का संकल्प लिया है। इसके लिए एक समिति ‘रामायण वार्ता प्रकाशन समिति’ गठित की गई है जिसकी अध्यक्षता सांसद विजय बघेल(Durg mp Vijay Baghel) को प्रदान की गई है। सांसद के जन्मदिवस से ठीक 2 दिन बाद काउंसिल की ओर से इस विषय की घोषणा की गई। सांसद ने बताया कि रामायण वार्ता संस्कृत भाषा में होगी, जिसे आम जन को समझने के लिए हर पृष्ठ के नीचे उस पृष्ठ की शब्दावली होगी। बघेल ने बताया कि इस माध्यम से देश की खोती लोक परंपरा और संस्कृति से आम जन को अवगत कराया जाएगा। इसके अलावा देश के चर्चित मंदिर, समाज में बेहतर कार्य कर रहे रामायणी तथा प्रभु श्रीराम एवं भगवती सीताजी के मानव कल्याण संदेशों से जन-जन को अवगत कराने के लिए इस माधयम से एक अभियान चलाया जाएगा। उन्होंने कहा कि हम हर अंक में न केवल संस्कृत भाषा में आलेख प्रकाशित करेंगे, बल्कि संस्कृत कैसे सीख या बोल सकते हैं, इस विषय की भी जानकारी देंगे।

vijay baghel durg mp

विजय बघेल, दुर्ग सांसद, छत्तीसगढ़

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलकर विषय से अवगत कराएंगे

सांसद ने कहा कि संस्कृत भाषा देव भाषा है और यह सारी भाषाओं की जननी है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी संस्कृत भाषा को सबलता प्रदान करने के लिए बहुत समय से प्रयासरत रहे हैं, लेकिन अब वक्त आ गया है कि विश्व को इस भाषा के प्रभाव से अवगत कराया जा सके। उन्होंने कहा कि वह शीघ्र ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलकर उन्हें इस विषय की जानकारी देंगे और फिर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसका कैसे प्रसार हो, इस पर कार्य करेंगे।

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