Emergency Airstrips in India: भारत में अब कई नेशनल हाईवे और एक्सप्रेसवे ऐसे तैयार किए जा चुक हैं, जहां इमरजेंसी में लड़ाकू विमानों की लैंडिंग हो सकती है। युद्ध के समय जब दुश्मन एयरबेस, रडार और रनवे को निशाना बनाता है, तब ये इमरजेंसी एयरस्ट्रिप (ELF) वायुसेना के लिए बहुत अहम साबित होते हैं। फाइटर जेट यहां से आसानी से उड़ान भरकर जवाबी कार्रवाई कर सकते हैं।
भारत में इमरजेंसी एयरस्ट्रिप (AI Image)
भारत में कितने एयरस्ट्रिप हैं?
साल 2022 तक आंकड़ों के अनुसार भारत में 11 राज्यों में करीब 28 इमरजेंसी लैंडिंग फैसिलिटी (ELF) का निर्माण किया जा चुका है। इनमें आंध्र प्रदेश, असम, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, पश्चिम बंगाल और जम्मू-कश्मीर जैसे राज्य शामिल हैं। कई अन्य जगहों पर अभी इनका निर्माण कार्य जारी है।
किन राज्यों में है इमरजेंसी एयरस्ट्रिप
भारत में स्थित 28 इमरजेंसी एयरस्ट्रिप में से सबसे अधिक असम में स्थित हैं। यहां 5 ELF विकसित किए जा चुके हैं। इसके अलावा पश्चिम बंगाल में 4, आंध्र प्रदेश में 3, गुजरात में 3, राजस्थान में 3 बिहार में 2, हरियाणा में 2, जम्मू-कश्मीर में 2, तमिलनाडु में 2, पंजाब में 1 और उत्तर प्रदेश में 1 इमरजेंसी एयरस्ट्रिप 2022 के आंकड़ों के अनुसार बनाए जा चुके हैं।
भारत का पहला इमरजेंसी एयरस्ट्रिप
भारत का सबसे पहला ELF राजस्थान के बाड़मेर जिले में बना था। यहां गंधव भाकासर सेक्शन में NH-925A पर 3 किलोमीटर लंबी और 33 मीटर चौड़ी एयरस्ट्रिप बनाई गई है। NHAI ने इसे 19 महीने में भारतीय वायुसेना के लिए बनाया था। जिसका उद्घाटन 2021 में हुआ था।
सबसे पहले किस हाईवे पर उतरा फाइटर जेट
हालांकि सबसे पहले जिस हाईवे पर सेना के विमान की लैंडिंग हुई थी, वह उत्तर प्रदेश में स्थित है। 2015 में भारत में पहली बार यमुना एक्सप्रेसवे पर विमानों की सफल लैंडिंग का अभ्यास किया गया था। इस दौरान मिराज-2000 फाइटर जेट की लैंडिंग की गई था। लेकिन उस समय यह स्थायी रूप से इमरजेंसी एयरस्ट्रिप के तौर पर दर्ज नहीं था। इसके बाद लखनऊ-आगरा, पूर्वांचल और अन्य एक्सप्रेसवे पर भी वायुसेना ने कई बार सफल अभ्यास किए हैं।
शाहजहांपुर में रात में भी हो सकती है लैंडिंग
उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर जिले में गंगा एक्सप्रेसवे पर बना एयरस्ट्रिप और भी खास है। इस 3.2 किमी लंबे ELF पर दिन के साथ-साथ रात में भी फाइटर जेट की लैंडिंग हो सकती है। इसके लिए यहां एडवांस्ड लाइटिंग और नेविगेशन सिस्टम लगाए गए हैं। इस एयरस्ट्रिप का निर्माण कैटेगरी-II ILS सिस्टम से किया गया है, जो कम विजिबिलिटी में भी सुरक्षित लैंडिंग सुनिश्चित करता है।
हाईवे पर इन एयरस्ट्रिप्स को इंटरनेशनल मानकों के अनुसार डिजाइन किया जाता है। जिनमें मजबूत कंक्रीट, सीधी व चौड़ी सड़क, बैरियर हटाने की सुविधा और ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम होता है, जिससे जरूरत पड़ने पर इन्हें तुरंत रनवे में बदला जा सके। इमरजेंसी एयरस्ट्रिप का कॉन्सेप्ट द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान जर्मनी से शुरू हुआ था। आज यह भारत समेत कई देशों में रक्षा रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है, जो किसी भी इमरजेंसी में देश की सुरक्षा को मजबूत करता है।
