Maratha Reservation: महाराष्ट्र में मराठा आरक्षण आंदोलन के कारण सीएम एकनाथ शिंदे अपने ही लोगों के बीच घिरते दिख रहे हैं। एक तरफ विपक्ष उनपर निशाने साध रहा है तो वहीं उनके अपने भी इस मामले पर साथ छोड़ रहे हैं। उधर प्रदर्शनकारी हिंसक हो चुके हैं और विधायकों और पार्टी ऑफिसों पर हमले बोल रहे हैं। बीड़ में हालत इतनी खराब हो गई है कि वहां कर्फ्यू लगाना पड़ गया है।
मराठा आरक्षण आंदोलन हुआ हिंसक
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सासंदों का इस्तीफा
महाराष्ट्र के नासिक और हिंगोली से शिवसेना के सांसदों ने मराठा समुदाय को आरक्षण देने की मांग के समर्थन में अपना इस्तीफा दे दिया। दोनों को मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे का करीबी माना जाता हैं। हिंगोली के सांसद हेमंत पाटिल ने सोमवार को नयी दिल्ली में लोकसभा सचिवालय को अपना इस्तीफा सौंपा, जबकि नासिक के सांसद हेमंत गोडसे ने अपना इस्तीफा मुख्यमंत्री शिंदे को भेजा है। पाटिल ने पद छोड़ने का फैसला तब किया जब यवतमाल में आंदोलनकारियों ने उन्हें रोक लिया और उनसे आरक्षण के मुद्दे पर अपना रुख स्पष्ट करने को कहा। पाटिल ने मौके पर ही अपना त्यागपत्र का मसौदा तैयार किया और आंदोलनकारियों को सौंप दिया।
बीड में कर्फ्यू
महाराष्ट्र के बीड में हिंसा भड़कने के बाद बीड जिला कलेक्टर दीपा मुधोल मुंडे ने जिला मुख्यालय और जिले के सभी तालुका मुख्यालयों के 5 किलोमीटर के दायरे में सीआरपीसी 144(2) के तहत निषेधाज्ञा आदेश जारी किए हैं। जिले में आज हुई हिंसा की घटनाओं के बाद अधिकारियों ने यह फैसला लिया है।
कई जगह आगजनी
मराठा समुदाय के लिए आरक्षण की मांग को लेकर जारी आंदोलन को सोमवार को हिंसा और आगजनी ने अपनी गिरफ्त में ले लिया। प्रदर्शनकारियों ने राकांपा विधायक प्रकाश सोलंकी के आवास को आग के हवाले कर दिया और उस पर पथराव किया, एक नगरपालिका भवन को फूंक दिया तथा एक अन्य विधायक के कार्यालय में तोड़फोड़ की। हिंसा की घटनाएं मध्य महाराष्ट्र के बीड और छत्रपति संभाजीनगर जिलों में हुईं।
आमरण अनशन जारी
हिंसा और आगजनी की ये घटनाएं ऐसे वक्त हुई हैं, जब आरक्षण कार्यकर्ता मनोज जरांगे जालना जिले के अंतरवाली सराटी गांव में 25 अक्टूबर से आमरण अनशन कर रहे हैं। वह मराठा समुदाय के लिए आरक्षण की मांग को लेकर आंदोलन के दूसरे चरण के तहत अनशन पर बैठे हैं।
