ED ने की ड्रग्स सिंडिकेट की नई साजिश बेनकाब, कैश नहीं, 'बार्टर' से हो रहा म्यांमार में नशे का भुगतान

ऑपरेशन ट्राइडेंट के बाद ईडी की जांच में ‘Drugs for Goods’ मॉड्यूल का बड़ा खुलासा हुआ है। ड्रग्स की कीमत चुकाने के लिए अब कैश के बजाय पेट्रोल, आटा, खाद्य तेल और दवाओं की सप्लाई का इस्तेमाल किया जा रहा था।

भारत-म्यांमार सीमा पर सक्रिय ड्रग्स तस्करी और उससे जुड़े वित्तीय नेटवर्क के खिलाफ ED और NCB ने संयुक्त रूप से ऑपरेशन ट्राइडेंट के तहत बड़ी कार्रवाई की थी। इस ऑपरेशन में 38 ठिकानों पर छापेमारी के दौरान अंतरराष्ट्रीय नार्को-कार्टेल से जुड़े कथित नेटवर्क, करीब 100 करोड़ रुपये के हवाला लेनदेन और ड्रग्स की कमाई को ठिकाने लगाने के तरीकों की पड़ताल की गई। अब इसी नेटवर्क की जांच में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने एक नया मॉड्यूल उजागर किया है। जांच में सामने आया है कि ड्रग्स की कीमत चुकाने के लिए कथित तौर पर सीधे पैसे सीमा पार भेजने के बजाय बार्टर सिस्टम यानी पेट्रोल-डीजल, आटा, खाद्य तेल, किराना सामान, दवाइयां, जूते और कपड़ों का इस्तेमाल किया जा रहा था।

ed ncb operation trident

ईडी की जांच में खुलासा

ED की जांच में इस तरीके को 'Drugs for Goods' के रूप में सामने लाया गया है। एजेंसी के मुताबिक, ड्रग्स की बिक्री से जुटाई गई रकम भारतीय बैंक खातों के जरिए पेट्रोल पंपों, आटा मिलों, किराना कारोबारियों, दवा विक्रेताओं और कपड़े-जूतों के व्यापारियों तक पहुंचाई जाती थी। इसके बाद सामान मिजोरम के सीमावर्ती इलाकों से म्यांमार भेजकर ड्रग्स सप्लायरों का बकाया चुकाने का कथित तरीका अपनाया गया।

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