ED Probe: प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने गुरुवार को कहा कि पूर्व मंत्री इंद्रनील सेन से जुड़े दुर्गा पूजा 'प्रीव्यू शो' मामले में धनशोधन जांच के दौरान पता चला कि उनकी कंपनी ने बैंकिंग माध्यम से 30 लाख रुपये पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के बैंक खातों में अंतरित किए थे।
पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी (फाइल फोटो)
क्या है पूरा मामला?
जांच एजेंसी ने कहा कि सेन ने दावा किया कि यह राशि 'रॉयल्टी' के रूप में दी गई थी। हालांकि, प्रवर्तन निदेशालय ने अपनी प्रेस विज्ञप्ति में इस लेनदेन को लेकर किसी आपराधिक कृत्य का आरोप नहीं लगाया। ममता बनर्जी-नीत तृणमूल के प्रवक्ता साकेत गोखले ने ईडी की आलोचना करते हुए उस पर पक्षपातपूर्ण कार्रवाई करने का आरोप लगाया।
उन्होंने कहा, ''राजनेताओं के खिलाफ ईडी के करीब 98 प्रतिशत मामले विपक्षी नेताओं के खिलाफ दर्ज किए गए। बाकी दो प्रतिशत वे लोग हैं जो भाजपा की 'वॉशिंग मशीन' में शामिल हो गए।'' ईडी ने इस सप्ताह की गई तलाशी के बाद सेन से जुड़े परिसर पर छापेमारी की और कोलकाता स्थित अपने कार्यालय में उनसे पूछताछ की।
ED का चौंका देने वाला दावा
ये तलाशी मासआर्ट (महनिर्वाण रोड मास आर्ट) सोसाइटी द्वारा कथित वित्तीय अनियमितताओं से जुड़े मामले के सिलसिले में की गई। इस सोसाइटी को उनकी पत्नी मधुचंदा सेन और अन्य लोगों ने शुरू किया था और वे इसके दुर्गा पूजा 'प्रीव्यू शो' का प्रबंधन कर रहे थे। ईडी ने दावा किया, ''जांच में पता चला है कि इंद्रनील सेन और उनके स्वामित्व वाली कंपनी 'ऑक्टेव रिकॉर्ड्स' के बैंक खातों में उनके कार्यकाल के दौरान 3.8 करोड़ रुपये से अधिक की नकदी जमा की गई थी।''
समाचार एजेंसी भाषा के मुताबिक, जांच एजेंसी ने कहा, ''ऑक्टेव रिकॉर्ड्स के बैंक खाते से करीब 30 लाख रुपये बैंकिंग माध्यम के जरिये पश्चिम बंगाल की तत्कालीन मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को हस्तांतरित किए गए थे, जिसे इंद्रनील सेन ने रॉयल्टी के रूप में भुगतान किए जाने का दावा किया है।'' धनशोधन का यह मामला बऊबाजार थाने में दर्ज प्राथमिकी से जुड़ा है। इसमें सेन, उनकी पत्नी और अन्य लोगों पर आरोप लगाया गया है कि उन्होंने 2022 से 2025 के बीच मासआर्ट के जरिए जनता से यह झूठा दावा करते हुए धन एकत्र किया कि यह यूनेस्को द्वारा प्रायोजित संस्था है और बाद में इन पैसों का इस्तेमाल निजी लाभ के लिए किया।
ईडी ने दावा किया कि आरोपियों ने दुर्गा पूजा के दर्शन को ''व्यवस्थित रूप से व्यावसायिक रूप दिया'' और इस तरह एक सार्वजनिक उत्सव को निजी लाभ के लिए एक व्यावसायिक उद्यम में बदल दिया। जांच एजेंसी ने कहा कि आरोपियों ने मासआर्ट के जरिए कोलकाता के 24 दुर्गा पूजा पंडालों में आयोजित 'प्रीव्यू शो' के लिए आम लोगों को 1,749 रुपये से 5,499 रुपये तक के टिकट बेचे।
ईडी ने कहा कि इस 'धोखाधड़ीपूर्ण' योजना का एक प्रमुख हिस्सा व्यावसायिक उद्देश्यों के लिए यूनेस्को के नाम, साख और लोगो का ''भ्रामक'' और ''अनधिकृत'' इस्तेमाल करना था। जांच एजेंसी ने पाया कि 2023 और 2024 के दो वर्षों के दौरान ऐसे एक लाख से अधिक टिकट जारी किए गए। ईडी ने यह भी दावा किया कि पूर्ववर्ती ममता सरकार में मंत्री रहे इंद्रनील सेन ने अपने करीबी सहयोगियों के स्वामित्व वाली संस्थाओं को 85 करोड़ रुपये से अधिक के टेंडर दिए थे। इन सहयोगियों ने बाद में बड़ी रकम नेता के रिश्तेदारों द्वारा नियंत्रित कंपनियों को भेजी थी।
