सोमवार को राज्यसभा में विदेश मंत्री एस जयशंकर ने पश्चिम एशिया में जारी जंंग पर कहा कि खाड़ी देशों में रह रहे भारतीयों की सुरक्षा के लिए सरकरा प्रतिबद्ध है। विदेश मंत्री ने कहा कि मिडिल ईस्ट पर सरकार की नजर है। राज्यसभा में विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा कि पश्चिम एशिया में हो रहे ताजा घटनाक्रम हम सभी के लिए गहरी चिंता का विषय हैं।
पीएम मोदी रख रहे हैं नजर- एस जयशंकर
उन्होंने कहा कि भारत का मानना है कि सभी विवादों का समाधान संवाद और चर्चा के जरिए ही निकाला जाना चाहिए और यही रास्ता अपनाया जाना चाहिए। जयशंकर ने यह भी बताया कि प्रधानमंत्री लगातार पश्चिम एशिया की स्थिति पर करीबी नजर बनाए हुए हैं और वहां के हालात पर लगातार निगरानी रखी जा रही है। विदेश मंत्री ने कहा कि पश्चिम एशिया में संघर्ष की वजह से फंसे भारतीयों को सुरक्षित वापस लाने के लिए सरकार हर संभव प्रयास कर रही है
सरकार लगातार कर रही है स्थिति का आकलन- जयशंकर
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा कि भारत शांति, संवाद और कूटनीति के जरिए समाधान का समर्थक है तथा मौजूदा परिस्थितियों में तनाव कम करने, संयम बरतने और नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की वकालत करता है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में ईरान के शीर्ष नेतृत्व से संपर्क करना स्वाभाविक रूप से कठिन है, हालांकि उन्होंने ईरान के विदेश मंत्री से बातचीत की है। पश्चिम एशिया में संघर्ष शुरू होने के बाद से भारत सरकार वहां की स्थिति का लगातार आकलन कर रही है।
विपक्ष का हंगामा
जयशंकर के बयान शुरू करने पर, कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों के सांसद खरगे को अपनी बात रखने देने और संक्षिप्त चर्चा की अनुमति देने की मांग करते रहे। आसन की ओर से अनुमति न दिए जाने पर विपक्ष के सदस्य सदन से बहिर्गमन कर गए। जयशंकर ने अपना बयान दिया। इसके बाद सदन के नेता जे पी नड्डा ने विपक्ष के व्यवहार को गैरजिम्मेदाराना करार दिया और कहा कि उनका उद्देश्य केवल अराजकता फैलाना है। नड्डा ने यह भी कहा कि विपक्षी दलों की देश के विकास में कोई दिलचस्पी नहीं है और वे विभिन्न मुद्दों पर बहस और चर्चा की मांग करते हैं लेकिन बहस या चर्चा का जब मंत्री जवाब देते हैं तो विपक्षी दल उनका बहिष्कार करते हैं।
