अमेरिकी उद्योगपति सोरोस चर्चा में हैं। चर्चा में इसलिए कि उन्होंने हाल ही में पीएम नरेंद्र मोदी की अगुवाई वाली सरकार पर सवाल उठाया और उनके नेतृत्व में लोकतंत्र को कमजोर होने का खतरा बताया। उनके इस बयान पर केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने कहा कि जो शख्स आर्थिक अपराधी वो इस तरह की बात कैसे कर सकता है। सोरोस को पहले अपने गिरेबां में झांकने की जरूरत है। सोरोस के बयान की कांग्रेस ने भी आलोचना की। इन सबके बीच विदेश मंत्री डॉ एस जयशंकर ने भी कड़ा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि सोरोस एक ऐसे शख्स हैं जो न्यूयॉर्क में बैठकर सोचते हैं कि उनके नजरिए से समूची दुनिया को काम करना चाहिए। यूं कहें तो उनके नजरिए को प्राथमिकता मिलना चाहिए। हकीकत में इस तरह के लोग अपने नजरिए को गढ़ने के लिए संसधानों का निवेश करते हैं।
डॉ एस जयशंकर, विदेश मंत्री
सोरोस को करारा जवाब
डॉ एस जयशंकर ने कहा कि उस तरह के लोग सोचते हैं कि उनकी पसंद का कोई शख्स सत्ता में आया तब तो चुनावी प्रक्रिय सही है। लेकिन यदि चुनाव का नतीजा उनकी उम्मीद के मुताबिक नहीं है तो वो कहना शुरू करेंगे कि पूरी चुनावी प्रक्रिया में दोष है। और उससे भी बड़ी बात यह है कि खुला समाज की आड़ ले इस तरह की वकालत करते हैं। इसके साथ ही कहा कि अगर आप भारत की बात करें तो पिछले तीन दशक में हमारे व्यापार का स्वरूप बदला है। अब भारत का ट्रेड पूर्वी देशों के साथ है। 50 फीसद से अधिक व्यापार भारत का इन देशों के साथ हैं और यह बड़ा बदलाव है। यह पश्चिनी, यूरोपीय और मिडिल ईस्ट के देशों से हटा है जो कि बड़े परिवर्तन का द्योतक है।
People like him think an election is good if the person they want to see, wins and if the election throws up a diff… t.co/6Z7LpOdOpC
— ANI (@ANI) Feb 18, 2023
भारत की विदेश नीति में बड़ा बदलाव
विदेश मंत्री ने कहा कि भारत की विदेश नीति में बड़ा बदलाव आया है। लेकिन इसके साथ वो यह भी बताना चाहेंगे कि अमेरिकी सोच में भी बड़ा बदलाव है। यह वो यूएस नहीं जिसके साथ हम 60 या 80 या 2005 में डील किया करते थे।अमेरिकी सोच में परिवर्तन का असर भी हम देख सकते हैं। वास्तव में हम नए सामरिक संकल्पना, भूराजनीतिक बदलाव और नई कार्यप्रणाली के दौर से गुजर रहे हैं अगर संकल्पना के स्तर पर देखें तो यह इंडो पैसिफिक और कार्यप्रणाली के तौर पर देखें तो यह क्वॉड है।
