तमिलनाडु की सत्ताधारी पार्टी द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) ने चुनाव आयोग द्वारा राज्य में शुरू किए गए मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision – SIR) को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। डीएमके का दावा है कि SIR के जरिए लाखों लोगों का नाम वोटर लिस्ट से काटा जा सकता है।
SIR के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में DMK की याचिका (फोटो- PTI)
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DMK का आरोप- "लाखों मतदाताओं का नाम कट सकता है"
DMK के संगठन सचिव आर.एस. भारती के माध्यम से दायर याचिका में कहा गया है कि चुनाव आयोग की यह प्रक्रिया पारदर्शिता और उचित प्रक्रिया के अभाव में चलाई जा रही है। पार्टी का दावा है कि इस पुनरीक्षण के तहत दस्तावेजीकरण की जटिल शर्तें, अपर्याप्त समयसीमा और मनमानी प्रक्रिया के कारण लाखों वास्तविक मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाए जा सकते हैं। DMK का कहना है कि यह कदम न केवल संविधान के तहत नागरिकों के मतदान के अधिकार का उल्लंघन है, बल्कि आगामी लोकसभा चुनावों की स्वतंत्रता और निष्पक्षता पर भी गंभीर प्रश्न खड़ा करता है।
सुप्रीम कोर्ट में DMK की दलील
याचिका में इसे अनुच्छेद 14, 19 और 21 (समानता का अधिकार, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और जीवन का अधिकार) और संविधान के अन्य प्रावधानों तथा जनप्रतिनिधित्व अधिनियम और 1960 के मतदाता पंजीकरण नियमों का उल्लंघन बताया गया है। याचिका सोमवार को वकील विवेक सिंह द्वारा उच्चतम न्यायालय की रजिस्ट्री में दायर की गई है और इस सप्ताह इस पर सुनवाई होने की संभावना है। याचिका में कहा गया है, "प्रतिवादी के 27 अक्टूबर, 2025 के आदेश से संबंधित रिकॉर्ड मंगवाए जाएं, जिसमें तमिलनाडु में विशेष गहन पुनरीक्षण का निर्देश दिया गया था।’’
चुनाव आयोग पर उठाए सवाल
याचिका में कहा गया है कि राज्य की मतदाता सूची को विशेष सारांश संशोधन (एसएसआर) के माध्यम से पहले ही अद्यतन किया जा चुका है, जो जनवरी 2025 में पूरा हो चुका है। द्रमुक की चुनौती का मुख्य बिंदु निर्वाचन आयोग द्वारा मतदाताओं, खासकर 2003 की मतदाता सूची में शामिल न होने वालों, के लिए नागरिकता साबित करने वाले दस्तावेज़ प्रस्तुत करने की अनिवार्यता है। याचिका में कहा गया है कि मतदाता सत्यापन को बिना किसी कानूनी आधार के वास्तविक राष्ट्रीय नागरिक पंजी (एनआरसी) में बदला जा रहा है।
