Delhi SIR: दिल्ली की विधानसभा सीट नंबर 40 नई दिल्ली में एसआईआर को लेकर सामने आई मीडिया रिपोर्ट पर दिल्ली मुख्य चुनाव अधिकारी के कार्यालय ने सफाई जारी की है। कार्यालय ने कहा है कि ड्राफ्ट मतदाता सूची में नाम नहीं होने का मतलब यह नहीं है कि संबंधित व्यक्ति को अंतिम तौर पर अयोग्य घोषित कर दिया गया है। कार्यालय के मुताबिक दिल्ली में मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR चुनाव आयोग के निर्देशों के तहत कराया जा रहा है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई पात्र नागरिक मतदाता सूची से बाहर न रहे और कोई अपात्र व्यक्ति सूची में शामिल न हो।
नई दिल्ली सीट की SIR लिस्ट पर उठे सवालों का चुनाव आयोग ने दिया जवाब
नाम नहीं है तो 30 सितंबर तक दावा कर सकते हैं
प्रेस रिलीज जारी करके बताया गया है कि 31 अगस्त 2026 को जारी ड्राफ्ट मतदाता सूची तैयार करने में 30 जून से 17 अगस्त के बीच जमा कराए गए गणना फॉर्म और तय सत्यापन प्रक्रिया को आधार बनाया गया है। ऐसे में जिन पात्र मतदाताओं के नाम ड्राफ्ट सूची में नहीं हैं, वे 31 अगस्त से 30 सितंबर 2026 के बीच फॉर्म-6 और जरूरी दस्तावेजों के साथ अपना नाम शामिल कराने के लिए दावा कर सकते हैं।
छात्रों के नाम नहीं होने पर भी सफाई
ब्लाइंड रिलीफ एसोसिएशन में छात्रों के नाम ड्राफ्ट सूची में नहीं होने को लेकर कार्यालय ने कहा कि संबंधित छात्र SIR की गणना अवधि के दौरान दिल्ली से बाहर चले गए थे और वहां रह नहीं रहे थे। इसी आधार पर बूथ लेवल अधिकारियों ने ऐसे मतदाताओं को ASDD सूची में रखा।
पिलंजी गांव के मामलों पर भी जवाब
पिलंजी गांव के कुछ मतदाताओं के बारे में कार्यालय ने कहा कि बूथ लेवल अधिकारी की रिपोर्ट में वे संबंधित पते पर रहते हुए नहीं पाए गए थे। बूथ लेवल अधिकारी की सिफारिश के आधार पर उनके नाम ASDD सूची में रखे गए और ड्राफ्ट मतदाता सूची से बाहर किए गए। वहीं गिरिश चंद्र पाल के मामले में कार्यालय ने बताया कि उनका नाम SIR शुरू होने से पहले ही 20 मई 2026 को सभी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद हटा दिया गया था।
जमशेद आलम के मामले में क्या कहा?
दरगाह सैयद हुसैन ऑफ पंचकुइयां रोड के निवासी जमशेद आलम के बारे में कार्यालय ने बताया कि SIR शुरू होने से पहले उनका नाम AC-40 की मतदाता सूची में था। बूथ लेवल अधिकारी जब उनका गणना फॉर्म देने पहुंचे तो उन्होंने फॉर्म लेने और उस पर हस्ताक्षर करने से इनकार कर दिया। कार्यालय के मुताबिक आलम ने बताया था कि बिहार में उनका एक अन्य मतदाता पहचान पत्र मौजूद है। इसी वजह से बूथ लेवल अधिकारी ने उन्हें “हस्ताक्षर करने से इनकार” वाली ASDD सूची में रखा।
सरकारी आवासों में रहने वालों के नाम पर भी स्पष्टीकरण
ईस्ट किदवई नगर के सरकारी आवासों में रहने वाले कई मतदाता केंद्र सरकार के अलग-अलग मंत्रालयों और विभागों के कर्मचारी हैं। कार्यालय के मुताबिक इनमें से कुछ कर्मचारी दिल्ली से बाहर स्थानांतरित हो गए थे या अपने आवंटित आवास में नहीं रह रहे थे। ऐसे मतदाताओं को तय प्रक्रिया के तहत ASDD सूची में रखा गया और ड्राफ्ट मतदाता सूची से बाहर किया गया। कार्यालय ने यह भी कहा कि मतदाता सूची लगातार अपडेट होने वाला वैधानिक रिकॉर्ड है। निवास बदलने, मृत्यु, दोहरी प्रविष्टि या पात्रता की शर्तें पूरी न होने जैसी वजहों से इसमें बदलाव हो सकता है।
SIR में ASDD वोटर कौन हैं?
SIR में ASDD सूची उन मतदाताओं की सूची है, जिनके नाम प्रारंभिक सत्यापन के बाद ड्राफ्ट मतदाता सूची में शामिल नहीं किए गए हैं। इसमें ऐसे लोगों को रखा गया है जो गणना के दौरान अपने पते पर नहीं मिले (ABSENT), दूसरे स्थान पर चले गए (Shifted), जिनकी मृत्यु हो चुकी है (Dead) और जिनका दो जगह मतदाता सूची में नाम (duplicate) होता है। इसके आधार पर नाम ड्राफ्ट सूची से बाहर किया गया है। हालांकि ASDD सूची में नाम होना अंतिम रूप से मतदाता होने से अयोग्य घोषित होना नहीं है। पात्र मतदाता 30 सितंबर तक दावा और जरूरी दस्तावेज देकर अपना नाम ड्राफ्ट सूची में शामिल करा सकते हैं।
